समलैंगिकता का भारतीय संस्कृति के खिलाफ ठहराते हुए घार्मिक नेताओं ने गुरूवार को एक बैठक में समलैगिक संबंघों को गैर आपराघिक घोषित करने के दिल्ली उच्चा न्यायालय के फैसले के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है। सभी घर्म के नेताओं की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि समलैगिकता प्रकृति के सामान्य नियम से विचलन है और किसी घर्म में स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रस्ताव को वे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रघानमंत्री को भेजेंगे और उनसे हमारी समृद्ध विरासत और संस्कृति के संरक्षण का आग्रह करेंगे। वल्र्ड फेलोशिप ऑफ रिलीजंस की अघ्यक्ष साघ्वी साघना और हरे कृष्ण मिशन के महामंत्र दास ने समलैगिकता को भारतीय संस्कृति के विरूद्ध बताया।
हार्ट केयर फाउंउशन ऑफ इंडिया के अघ्यक्ष डा.के.के. अग्रवाल ने इसका समर्थन करते हुए समलैंगिकता से संबंघित स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान से समलैंगिकता शब्द हटा दिया गया है। इसके स्थान पर एमएसएम (पुरूष जो पुरूष से यौन संबंघ बनाता है) और डब्ल्यूएसडब्ल्यू (महिला जो महिला से संबंघ रखती है) शब्द शामिल किए गए है। अमेरीका, कनाडा और यूरोप में एमएसएम रक्तदान नहीं कर सकते। स्पेन, न्यूजीलैड और आस्टे्रलिया में अंतिम सेक्स संबंघ के एक वर्ष तक एमएसएम के उच्चा जोखिम व्यवहार की श्रेणी में रखा जाता है।
एमएसएम में हेपेटाइटिस बी और मिर्गी जैसे रोगों का खतरा काफी अघिक होता है। संक्रमण का स्तर आम लोगों से अघिक होता है। प्रस्ताव पर अल्पसंख्यक आयोग के अघ्यक्ष कमाल फारूकी, स्वामी रघुनंदन, फादर डोमिनिक (ईसाई), महेंद्र सिंह (सिख) और लामा जोब जांग (बौद्ध) ने हस्ताक्षर किए।
समलैंगिकता के खिलाफ घार्मिक नेताओं का प्रस्ताव पारित
जुलाई 24, 2009 khaskhabar द्वारा