बाबरी मस्जिद ढहाने के मामले की जांच करने वाले लिब्रहान आयोग ने राजनीति से धर्म के मेल पर क़डी आपत्ति करते हुए सिफारिश की है कि राजनीतिक सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से इस तरह के दुरूपयोग के लिए क़डे दंड का प्रावधान करने वाला कानून बनना चाहिए।
आयोग की भारी भरकम रपट आज संसद के दोनों सदनों में गृह मंत्री पी चिदंबरम ने पेश की। न्यायाधीश मनमोहन सिंह लिब्रहान की अध्यक्षता वाले आयोग ने 17 जून को अपनी रपट सरकार को सौंप दी थी। आयोग की रपट के साथ पेश 13 पृष्ठों की कार्रवाई रपट (एटीआर) में कहा गया है कि सरकार ने आयोग की सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं और वे दंगों को नियंत्रित करने के लिए सांप्रदायिक हिंसा विधेयक लागू करने का इरादा कर रही है। साथ ही उसका ऎसी घटनाओं से निपटने के लिए विशेष अदालतौं के गठन का भी इरादा है।
एटीआर में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह सहित भाजपा के शीर्ष नेताओं और संघ परिवार से जु़डे संगठनों के नेताओं के दोषी पाए जाने का कोई उल्लेख नहीं है।
अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की घटना के दस दिन बाद आयोग का गठन किया गया था। आयोग ने कहा, धर्म को राजनीति से अलग करने की संवैधानिक अवधारणा का उद्देश्य शासन और धर्म को अलग करना है।
धर्म का दुरूपयोग रोकने के लिए बने कानून: लिब्रहान
नवम्बर 24, 2009 khaskhabar द्वारा
