निर्माता: रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर
निर्देशक: विवेक ललवानी
संगीत: शंकर-अहसान-लॉय
कलाकार: फरहान अख्तर, दीपिका पादूकोण, राम कपूर, विवान, विपिन शर्मा, शैफाली शाह
समीक्षा: फिल्म कार्तिक कॉलिंग कार्तिक में कार्तिक नारायण (फरहान अख्तर) एक लूजर है। कार्तिक एक सीधे-सादे, हारे हुए मध्यम परिवार के लडके की कहानी है, जिसमें आत्मविश्वास नाम की कोई चीज नहीं है। ऑफिस में सबसे ज्यादा काम करने के बावजूद उसे बॉस की बातें सुननी पडती है। कोई उसका दोस्त नहीं है। साथ में काम करने वाली शोनाली मुखर्जी (दीपिका पादूकोण) को वो चाहता है। हजार से भी ज्यादा मेल उसने शोनाली के लिए टाइप किए है, लेकिन आत्मविश्वास नहीं है इसलिए सेव करके रखे है। कार्तिक के पास एक दिन घर पर उसके बॉस का फोन आता है। जोरदार डांट खाने के बाद वह फोन फेक कर तोड देता है। फिर नया फोन लाता है और उसके बाद रोजाना सुबह पांच बजे कार्तिक के पास फोन आने शुरू हो जाते है। घबराकर कार्तिक टेलीफोन एक्सचेज से पता लगवाता है, लेकिन वहां से उसे बताया जाता है कि उसे उसके द्वारा बताए गए वक्त पर कोई कॉल्स नहीं आ रही है।
फोन वाला कार्तिक कुछ ऎसी बातें बताता है कि कार्तिक की जिंदगी बदल जाती है। उसमें गजब का आत्मविश्वास आ जाता है। जिस ऑफिस से उसे निकाला गया था उसी ऑफिस में उसे चार गुना सैलेरी पर रखा जाता है। जो शोनाली उसकी तरफ देखती भी नहीं थीं, वो उसकी गर्लफ्रेंड बन जाती है। फोन वाला कार्तिक चेतावनी देता है कि यह बात किसी को बताना नहीं है, इसके बावजूद कार्तिक अपनी गर्लफ्रेंड को यह बात बता देता है। गर्लफ्रेंड उसे डॉक्टर के पास ले जाती है। कार्तिक की इस हरकत से फोन वाला कार्तिक उसकी जिंदगी बरबाद कर देता है। जॉब और गर्लफ्रेंड दोनों उससे संबंध तोड लेते। जब कार्तिक को बदलने वाला कार्तिक ही उसका दुश्मन हो जाता है तो कहानी में नया मोड आता है और बेचारा कार्तिक खुद ही अपनी जिंदगी को बचाने की जद्दोजहद में लग जाता है और ये क्षण दिल को छू लेनेवाले है।
लेखक-निर्देशक विजय ललवानी ने कार्तिक कॉलिंग कार्तिक को बडे ही प्यार से बनाया है। उनकी हॉलीवुड शैली बेहद दिलचस्प है और संपादन भी चुस्त है। कहानी में नयापन नहीं है, लेकिन उसकी शैली और संवाद उसे दर्शनीय बना देते है। सिनेमाटोग्राफी भी आकषक है। फरहान और दीपिका के रोमांस को बेहतरीन तरीके से पेश किया गया है। दोनों की कैमेस्ट्री अच्छी लगती है। एक हॉट तो दूजा कूल। दोनों के कैरेक्टर को उम्दा तरीके से स्टेबलिश किया है। डॉयलॉग्स बेहतरीन है। लेखक के रूप में विजय को थोडा हार्ड वर्क करना था, खासतौर पर सेकंड हाफ में लिखे गए कुछ दृश्य कमजोर है। इस हिस्से में फिल्म सीरियस हो गई है। दो गाने बेवजह ठूंसे गए है। सस्पेंस को लेकर दर्शकों में वो थ्रिल पैदा नहीं कर पाए।
कार्तिक को कौन कॉल कर रहा है इस नतीजे पर भी फिल्म अचानक पहुंच जाती है। फिल्म को समेटने में जल्दबाजी की गई हैं। फरहान अख्तर ने इस फिल्म में खुद को और श्रेष्ठ साबित किया है। पर्दे पर वे खूब जंचते है और यह भी साबित होता है कि किसी भी तरह के किरदार में डूब जाने का तरीका उनमें है। एक बेहतरीन अदाकार अपने निर्माण की प्रक्रिया में है और फरहान इसे जारी रखते है तो यह समय बेहतर है। दीपिका पादूकोण मन को लुभाती है और एक बिंदास बाला के रूप में अपनी भूमिका बखूबी निभाती है। इस फिल्म में उन्हें अभिनय दिखाने के लिए ज्यादा अवसर नहीं थे, लेकिन फरहान के साथ आकर्षक जोडी बनाने में वे सफल हुई हैं।
कार्तिक कॉलिंग कार्तिक के अंत में आप भले ही सहमत ना हो, लेकिन उम्दा प्रस्तुतिकरण और बेहतरीन अभिनय के कारण यह फिल्म एक बार देखी जा सकती हैं।
देखने लायक है कार्तिक कॉलिंग कार्तिक
फ़रवरी 27, 2010 khaskhabar द्वारा
अच्छी रिव्यू। फिल्म देखनी पड़ेगी।