तालिबानी प्रत़ाडना की पहचान बनी अफगान युवती को अमेरिका में प्लास्टिक सर्जरी के जरिए नई नाक मिल गई है। इस महिला के पति ने उसकी नाक काट दी थी। जब 19 वर्षीय आयशा की बिना नाक वाली तस्वीर जारी हुई थी तो उनके लिए सहानुभूति की लहर दौ़ड प़डी थी।
उनकी तस्वीर “टाइम” प्रत्रिका के मुखपृष्ठ पर प्रकाशित हुई थी और अंदर के पृष्ठों पर अफगानिस्तान में महिलाओं की दुर्दशा पर एक लेख प्रकाशित हुआ था। समाचार पत्र “डेली टेलीग्राफ” के मुताबिक उनकी लास एंजेलिस में हुई सर्जरी के लिए “ग्रॉसमैन बर्न फाउंडेशन” ने वित्तीय मदद दी थी। फाउंडेशन ने आयशा को “एंडयूरिंग हार्ट” पुरस्कार से सम्मानित किया था। गवर्नर आर्नोल्ड श्वात्जेनेगर की पत्नी मारिया श्रीवर ने आयशा को यह पुरस्कार दिया था। मारिया ने कहा था, “”पहली बार किसी ऎसी महिला को “एंडयूरिंग हार्ट” पुरस्कार दिया गया है जो बहुत सहनशील है और जिसने हमें बताया है कि प्यार और मजबूत दिल का होना क्या होता है।”" अब आयशा को नई नाक लगा दी गई है। जब आयशा केवल 12 साल की थी तब उसके पिता ने अपना कर्ज चुकाने के लिए एक तालिबानी ल़डाके से उसके विवाह का वादा किया था। आयशा के साथ मार-पीट की गई थी और उसे एक अस्तबल में जानवरों के साथ सोने को मजबूर किया गया था। जब वह वहां से भागने की कोशिश कर रही थी तब उसे पक़ड लिया गया और उसके पति ने दंड स्वरूप उसके कान और नाक काट दिए। बाद में वह किसी तरह से अपने दादा के घर पहुंची और उसे वहां एक अमेरिकी चिकित्सालय ले जाया गया। बाद में वह अमेरिका पहुंची।