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Archive for नवम्बर, 2010

लास एंजेलिस। गायिका पिंक पति कैरी हार्ट के साथ अपने पहले बच्चो को जन्म देने वाली हैं लेकिन वह मद्यपान छो़डने के लिए तैयार नहीं हैं।
पिंक मानती हैं कि कभी-कभी शराब पीना फायदेमंद है। वेबसाइट “एस शोबीज डॉट कॉम” के मुताबिक पिंक 2011 के बसंत में अपने बच्चो को जन्म देंगी। पिंक कहती हैं कि वह बहुत अनुशासित हैं, जब खेलने का समय होता है तो वह खेलती हैं, जब काम का समय होता है तो वह काम करती हैं और जब उन्हें सावधान रहना चाहिए तब वह सावधान रहती हैं। वह कहती हैं कि कभी-कभी शराब पीना आपके लिए अच्छा है।

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लंदन। रोक स्टार कर्टनी लव ने अपनी अश्लील तस्वीरें खिंचवाकर अपने चाहने वालों को फिर चौका दिया।
लव ने अश्लील तस्वीरों को सोशल नेटवर्किग साइट टि्वटर पर डालकर अपने प्रशंसकों को अचंभित कर दिया। इन फोटो में वे अपनी महिला दोस्त को किस कर रही है, कुछ में उनके अंक साफ नजर आ रहे है। एक तो वे सिर्फ ब्रा पहने हुए है।
द होल से मशहूर हुई लव ने पिछल छह महीने से टि्वटर से नाता तोड रखा था। लेकिन अचानक अपनी अश्लील तस्वीरें डालकर फिर से सनसनी मचा दी है। सूत्रों के अनुसार उन्होंने यह काम शायद किसी ब्यायफ्रेंड को रिझाने की मंशा से किया है।

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गायिका बेयोन्से नोल्स ने अपने हाथ की अनामिका पर एक टैटू बनवाया है और वह इसे बेहद पसंद करती हैं। यह टैटू उनकी उंगली पर एक अंगूठी जैसा दिखता है।

वेबसाइट “द सन डॉट को डॉट युके” के मुताबिक सोमवार को न्यूयार्क में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह टैटू दिखाया था। पहली नजर में यह टैटू भूरे रंग के एक धब्बे जैसा दिखता है लेकिन नजदीक से देखें तो इसमें रोमन लिपी में चार का अंक बना हुआ है। नोल्स का यह टैटू उनके जन्मदिन (चार सितम्बर) व उनके पति जे-जेड के जन्मदिन (चार दिसम्बर) को प्रदर्शित करता है।

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भारतीय वैदिक संस्कृति में मानव जीवन के सोलह संस्कार माने जाते हैं। इन सोलह संस्कारों में विवाह, जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार है। कन्या के लिए यह अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है जब वह अपने पिछले सारे रिश्तों को छो़डकर एक नए वातावरण में कदम रखती है और नए लोगों से रिश्ता बनाती है। भारतीय संस्कृति और धर्म में विवाह को लेकर बहुत सी व्यवस्थाएं हैं, जिनका पालन किया जाना एक ओर तो वैज्ञानिक है तो दूसरी ओर अपने रिश्तों को निभाए जाने की शिक्षा दिया जाना है। परंपराओं को धर्म का रूप दिया जाकर मनवाने का कार्य ऋषियों ने पूरा किया। इस क्रम में हम कुछ ऎसी बातें बता रहे हैं जो आवश्यक है या जिन्हें पूरा करना अनिवार्य सा हो जाता है।
1. वस्त्र : कन्या के विवाह से पूर्व कन्या के पिता और वरपक्ष दोनों ही द्वारा वस्त्र एवं आभूषण क्रय किए जाते हैं। वस्त्रों में लाल, पीले और गुलाबी रंगों को अधिक मान्यता दी जानी चाहिए क्योंकि लाल रंग सौभाग्य का प्रतीक माना गया है जिसके पीछे वैज्ञानिक तथ्य यह है कि लाल रंग ऊर्जा का स्तोत्र है। ल़डका-ल़डकी के पहनावे में ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखें तो एक नए परिवार के नए रिश्तों को जो़डने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा की भावना को प्रधान करना है। इसके विपरीत जब हम नीले, भूरे और काले रंगों की मनाही करते हैं तो उसके पीछे भी वैज्ञानिक कारण हैं। काला और गहरा रंग नैराश्य का प्रतीक है और ऎसी भावनाओं को शुभ कार्यो में नहीं आने देना चाहिए। जब पहले ही कोई नकारात्मक विचार मन में जन्म ले लेंगे तो रिश्ते का आधार मजबूत नहीं हो सकता।
2. आभूषण :
नववधू को भारी और विभिन्न आभूषणों के पहनाए जाने के वैज्ञानिक कारण ही हैं। पहले जब वधू को कमरधनी (तग़डी) पहनाई जाती थी और गले में भारी हार पहनाए जाते थे और भारी-भारी पायजेब भी पहनाई जाती थी तो उसके पीछे तथ्य शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखना था। ये विशेष आभूषण भारी होने से एक्युप्रेशर के पाईन्ट को दबाए रखने का एक महत्वपूर्ण साधन हैं और पायल रिप्रोडेक्टिव ऑर्गनको भी ठीक रखती थी। यही कारण है कि आभूषण केवल çस्त्रयाँ ही नहीं पहनती थीं बल्कि पुरूष भी ब़डे और भारी आभूषण धारण किया करते थे। आज भारी आभूषणों की जगह हल्के और सुंदर आभूषणों ने ले ली है और इन सबके पीछे काल और परिस्थिति का बदल जाना है।
3. तेल चढ़ाना : तेल चढ़ाने की रस्म के पीछे यह तथ्य है कि तेल से जब शरीर की मालिश की जाती है तो थके हुए शरीर को राहत मिलती है। प्राचीन समय में शारीरिक श्रम अधिक हुआ करता था और उस शारीरिक श्रम को राहत देना इसके पीछे मुख्य उद्देश्य था। आज मालिश का स्थान केवल तेल को छू कर रस्म पूरी कर देने ने ले लिया है।
4. उबटन लगाना : उबटन में मुख्य रूप से बेसन, हल्दी और दूध या दही का प्रयोग होता था। जिसका उद्देश्य वधू के सौन्दर्य को प्राकृतिक रूप से निखारना है। हल्दी एन्टीसेप्टीक का भी काम करती है इसलिए इस उबटन को एकऔपचारिकता पूरी करना ना मानकर सही मायने में उबटन का प्रयोग पूरे शरीर पर करना चाहिए। हमारी प्राचीन मान्यताएं व्यर्थ नहीं बनाई गई हैं, प्रत्येक मान्यता और रस्म-रिवाज में विज्ञान छिपा है। ऋषियों ने इन वैज्ञानिक तथ्यों को धर्म का रूप देकर सामान्यजन से उन्हें मनवा लिया।
5.मेंहदी लगाना : मेंहदी सोलह श्रृंगारों में से एक है। यह ना केवल सौंन्दर्य बढ़ाती है बल्कि इसके लगाने के पीछे तथ्य यह है कि मेंहदी की तासीर ठण्डी होती है और हाथों में मेंहदी लगाए जाने का उद्देश्य अपने धैर्य और शांति को बनाए रखने का प्रतीक माना जा सकता है। आज मेंहदी का प्रयोग ना केवल हाथों में होता है बल्कि पैरों में भी शौक के रूप में इसे लगाया जाता है जो एक अच्छा संकेत है।
6.सरबाला-सरबाली :
मेंहदी की रस्म विवाह के कुछ दिन पूर्व किए जाने की परंपरा का शास्त्रों में उल्लेख है तथा मेंहदी लग जाने के बाद घर से न निकलने का भी प्रावधान है। इसके अलावा मेंहदी लग जाने के बाद से ही तुरंत वर और वधू दोनों के ही साथ उनके निकटतम मित्र और सखी या फिर कोई समान आयु का निकटतम रिश्तेदार निरंतर साथ बना रहने का उल्लेख शास्त्रों में किया गया है। ऎसा पहले भी किया जाता था कि सरबाला-सरबाली (रिश्तेदार या मित्र जो साथ रहता है) होते थे और आज भी यह प्रथा जारी है। इसके पीछे भी कोई रूढि़ या दकियानूसी धारणा नहीं है बल्कि ऎसा इसलिए किया जाता है कि यदि कोई नकारात्मक शक्ति उस समय वहां है तो वह शक्ति संशय में रहे और वास्तविक वर-वधू को किसी भी नकारात्मक प्रभाव से बचाया जा सके। यद्यपि आज मेंहदी की रस्म घर में कम और ब्यूटी पार्लर>में भी अधिक निभायी जाती है परंतु इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि मेंहदी लगने के बाद वधू को घर से बाहर न निकलने दिया जाए।
7. मांगलिक गीत :
नववधू जब घर में प्रवेश करती है तो मंगल गीतों से उसका स्वागत होता है और विवाह से पूर्व भी उसके मायके में गीत गाए जाते हैं। इन गीतों का संबंध ज्योतिष के परिपेक्ष में घर की नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करना मंगल गान व साजों की ध्वनि से सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाना है। प्राचीन समय में यह गीत कन्या व युवक दोनों ही घरों में विवाह से पूर्व लगभग 15 दिन पहले से गाए जाते थे। आज इसका स्वरूप बदल गया है तथा इसका स्थान आधुनिक फिल्मी गीतों व साजों ने ले लिया है और एक ही दिन महिला संगीत का आयोजन कर दिया जाता है। निश्चितत: ऎसा आधुनिक भाग-दौ़ड भरी जिंदगी के कारण है परंतु फिर भी कुछ आयोजन ऎसा अवश्य किया जाना चाहिए जिसका संबंध आध्यात्म से हो।
8. मांग भरना : विवाह के समय वधू की माँग सिंदूर से भरने का प्रावधान है तथा विवाह के पश्चात् ही सौभाग्य सूचक के रूप में माँग में सिंदूर भरा जाता है। यह सिंदूर माथे से लगाना आरंभ करके और जितनी लंबी मांग हो उतना भरा जाने का प्रावधान है। यह सिंदूर केवल सौभाग्य का ही सूचक नहीं है इसके पीछे जो वैज्ञानिक धारणा है कि वह यह है कि माथे और मस्तिष्क के चक्रों को सक्रिय बनाए रखा जाए जिससे कि ना केवल मानसिक शांति बनी रहे बल्कि सामंजस्य की भावना भी बराबर बलवती बनी रहे।
9. कन्या विदाई और तारा दर्शन : अरून्धती बrार्षि वसिष्ठ जी की पत्नी हैं। महर्षि वसिष्ठ सूर्यवंशी राजाओं के एकमात्र गुरू रहे हैं। अरून्धती के समान रूप, गुण व धर्म-परायण दूसरी कोई स्त्री नहीं है तथा अरून्धती की आयु सात कल्पों तक मानी गई है। वे सदैव अपने पति के साथ रहती है। अरून्धती के अतिरिक्त अन्य किसी भी ऋषि पत्नी को सप्तर्षि मंडल में स्थान नहीं मिला है। नववधू को विवाह के अवसर पर तारा दर्शन की रस्म के रूप में देवी अरून्धती के ही दर्शन कराए जाते हैं। ऎसी मान्यता है कि इसके दर्शन से अरून्धती के जैसे गुणों का विकास नववधू में हो तथा जिस प्रकार अरून्धती का अखण्ड सौभाग्य बना हुआ है, उसी प्रकार नववधू का भी सौभाग्य अखण्ड रहे।
10. रसोई प्रवेश : वधू के ससुराल में प्रवेश से कुछ समय बाद ही विधि पूर्वक उसे रसोई में एक निश्चित मुहूत्त में खाना बनाने के लिए भेजा जाता है। आश्चर्यजनक बात है कि खाने में सबसे पहले कुछ मीठा बनवाया जाता है और घर के प्रत्येक वरिष्ठ सदस्य वधू को शगुन के रूप में कुछ ना कुछ उपहार अवश्य देता है। मीठा बनवाने के पीछे संभवत: यही धारणा रही होगी कि नए परिवेश में आकर रिश्तों की मिठास बनाए रखने की प्रेरणा वधू को मिले और उपहार देने के पीछे भी संभवत: यही तथ्य रहा होगा कि सामंजस्य और रिश्तों को निभाने की भावना लगातार बनी रहे और बहू अपने उत्तरदायित्व को यहीं समझ लें और परिवार की मान्यताओं और वरिष्ठ सदस्यों के प्रति सम्मान से भरी रहे।
ज्योतिष शास्त्र की मूल भावना यह है कि मनुष्य का जीवन शांति एवं प्रसन्नतापूर्वक चलता रहे, इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए ज्योतिष आचार्यो ने ऎसे शुभ क्षणों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पालन करने की प्रथा का चलन किया। यद्यपि आधुनिक युग में इन प्रथाओ ने अपना रूप बदल लिया है परंतु नाम वही हैं। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हम उन प्रथाओं का उसी रूप में पालन करें जिस रूप में हमसे अपेक्षित हैं। इनके पालन करने से या पालन आज भी करवाने से मेरा उद्देश्य यहाँ रूढि़वाद को बढ़ावा देना नहीं है बल्कि रूढि़यों के रूप में जो प्रथाएं हमारे सामने हैं उनके वैज्ञानिक पक्ष के महत्व को जानना है।

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हिन्दी साहित्य के महान कवि बिहारी ने अपनी नायिका के सौन्दर्य का चित्रण करते समय लगभग सभी सीमाएं पार कर दीं परन्तु उनके “गागर में सागर” भरे काव्य में नायिका का सौन्दर्य तब भी नहीं समाया और मानों वह छलक कर बाहर आने लगा हो। न केवल कवियों की अपितु भारतीय सिनेमा के गीतकारों ने भी अपने गीतों में एक ओर यदि शब्दों को महत्व दिया है तो उससे कहीं ऊपर नायक या नायिका की आँखों के सौन्दर्य की बात अधिक की है। वे आँखें जो जुबां बन जाती हैं और बिना कुछ कहे ही सब कुछ कहने की क्षमता कुछ पलों में जुटा लेती हैं और सामने बैठा हुआ शख्स आसानी से ही बिना कुछ कहे सुने ही सब समझ जाता है। अभिव्यक्ति का सर्वश्रेष्ठ साधन जुबां नहीं भाव से भरी हुई आँखें हैं। इस संदर्भ में यदि हम कुछ गीतों या गजलों की बात करें तो उनमें हम “इशारों-इशारों में दिल लेने वाले” या फिर- “एक शाम की दहलीज पर बैठे रहे वो देर तक आंखों से की बातें बहुत मुंह से कहा कुछ भी नहीं” इनके आधार पर हम आँखों के सौन्दर्य और अभिव्यक्ति दोनों को समझ सकते हैं। यह जरूरी नहीं है कि आँखों के माध्यम से दिल जिन्हें पसंद करे या जिसके लिए मन में अपार स्नेह उम़ड रहा हो, वे शारीरिक रूप से सुन्दर हों बल्कि इसके लिए आवश्यक है कि उन आँखों में पूरी तरह डूबा जाए और भावनाओं के उतार-चढ़ाव को इनके के माध्यम से पढ़ने की कोशिश की जाए। आंखों की सुंदरता या कुरूपता ग्रहों की देन है। आंखें कुरूप नहीं होतीं अपितु उसमें से प्रदर्शित होने वाले भाव या दृष्टि ही उन्हें सुंदरता या कुरूपता का दर्जा सामने वाले से दिलाते है। अब हम विभिन्न राशि के व्यक्तियों की आँखों की चर्चा करेंगे और इनके माध्यम से यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि ग्रह आपकी आंखों के माध्यम से क्या कह रहे हैं।
मेष राशि और आंखें: मेष राशि के स्वामी मंगल होते हैं और इस राशि के व्यक्ति की आँखों में सेनापति की पक़ड मजबूती से बनी होती है अर्थात् ये सामने वाले के भाव और चेहरा बखूबी पढ़ लेते हैं और केवल इनकी दृष्टि ही लगभग शत्रु को परास्त करने में सफल होती है। तल्ख दृष्टि, रोबदार आँखें पर्याप्त हैं किसी को यह अहसास कराने के लिए कि तुम्हारी फलां-फलां बात से न तो हम सहमत हैं और ना ही हमें पसंद आई है इसलिए प्रतिक्रिया भी  तीव्र आता है और पर्याप्त होता है किसी की एक विशेष गतिविधि को रोकने के लिए। संभव है कि यदि मेरी दृष्टि से देखा जाए तो यह सुंदरता है कि अनुशासन बना रहे परन्तु सामने वाले की दृष्टि में यही एक कुरूपता का रूप ले ले और मेरे विषय में यह प्रचलित हो जाए कि आँखें कितनी भयानक हैं। मंगल की अग्नि संभवत: मेरे स्वभाव में है और आँखों के माध्यम से व्यक्त भी हो रही है अत: हमें यह बात ध्यान में रखनी होगी कि सौन्दर्य इसमें नहीं कि हम उसे किस दृष्टि से देख रहे हैं अपितु सौन्दर्य वो है जो सामने वाला हमारे प्रति महसूस कर रहा है या जो सच है।
वृषभ: एक ठोस व्यक्तित्व के साथ धीर-गंभीर स्वभाव और वही आँखों से टपकता हुआ दिखाई देता है। जो स्नेह दे उसके लिए अपना जीवन निकाल कर दे दो। इसके लिए जुब़ान की आवश्यकता नहीं होती है बल्कि आँखों से वृषभ राशि वाले अहसास करा देते हैं। इसके विपरीत यदि करूणा अथवा स्नेह का भाव खत्म हो तो यही आँखें कठोरता की प्रतिमूर्ति बन जाती हैं। यह अनुमान लगाना कठिन हो जाता है कि किस पल यह आँखें क्या कह जाएंगी, क्या इनसे सौन्दर्य छलकेगा? या वह कठोरता छलकेगी जो एक अ़डयल रवैये को अपनाकर येन-केन प्रकारेण अपनी बात मनवा लेगी और अपनी कठोरता का परिचय अनकहे ही दे जाएगी।
मिथुन: बुध की कोमलता इन आँखों में दिखाई देती है तो दूसरी ओर मार्केटिंग का श्रेष्ठ कौशल। यहाँ मार्केटिंग से वस्तुओं की मार्केटिग से नहीं है अपितु अपने भावों और वाणी दोनों से सामने वाले को आकषित करके अपना हित साधन कर लेना है, क्या इसे हम सौन्दर्य नहीं कहेंगेक् निश्चितत: कहेंगे, हमारा काम (मिथुन राशि वाले का) तो मतलब निकालने और बाजी मार लेने से है उसके लिए भले ही हमें गधे को भी बाप बनाने की कहावत को चरितार्थ करना प़डे। यहाँ बुध की वाणी की बात नहीं है बल्कि उनके भाव से है जो व्यक्त करते हैं या सामने वाले को अपनी कलाओं से रिझाते हैं। दोहरी बात करना, उसका मतलब दूसरा खोजे और समय प़डने पर या बात स्वयं पर आने पर अपनी बात से पीछे हटें। इन आँखों की तुलना उस छोटे बच्चो से की जा सकती है जो अपनी बात मनवाने के लिए पहले तो रिझाता है और फिर ना रीझने से जिद में आकर तो़ड-फो़ड की प्रक्रिया अपनाकर काम निकाल लेता है।
कर्क: पनीली आँखें, अपनी ओर आकर्षित करती हुई और जरूरत प़डने पर कठोरता की पराकाष्ठा। इन आँखों में विशेष रूप से लोगों को अपने अनुसार ढालने का गुण सदैव ही विद्यमान रहता है जहाँ इनकी बात मानी जाती रहे, यह अपना समस्त स्त्रेह लुटा देंगी परंतु जरा अवहेलना हुई नहीं कि निर्मम प्रहार हुआ। इनकी तुलना उस माँ से की जा सकती है जिसके लिए संतान सर्वस्व है परंतु जैसे ही बच्चो के कदम डगमगाए, वहां इतनी कठोरता का परिचय मिल जाएगा कि फिर व्यक्ति सिर ही ना उठा सके। कठोरता आँखों से कूट-कूट कर झलकती है और काफी होती है व्यक्ति को यह एहसास कराने के लिए यदि स्त्रेह दिल से किया जाए तो नफरत भी उतने ही दिल से की जाएगी। ये भाव आँखों से ही झलक जाते हैं। क्या इन्हें हम सौन्दर्य कहें या फिर कुरूपता? निश्चित ही सौन्दर्य कहा जाएगा क्योंकि सिखाने के लिए कुछ कठोर होना कुरूपता नहीं अपनापन है।
सिंह: हम एक हैं और एक ही रहेंगे हमारे अलावा और कोई मैदान में नहीं रहें, ये भाव सिंह राशि की आँखों में बरबस ही दिखाई दे जाते हैं। राजा होने का गर्व दूर से ही आँखों से पहचाना जा सकता है। झपटकर चीजों को हासिल करने का भाव भी आसानी से इन आँखों में देखा जा सकता है। ऎश्वर्य और आराम का जीवन देकर सिंह जब किसी को सुरक्षा देता है तब यह भूल जाता है कि शिकार स्वयं को ही करना प़डेगा अन्य कोई मारकर नहीं लाएगा तो पश्चाताप भी उन्हीं आँखों की देन होता है। क्या खूबसूरत सम्मिश्रण है अपनापन, अधिकार और पश्चाताप का, क्या इसके अतिरिक्त किसी और सौन्दर्य की आवश्यकता प़डती है, मैं समझता हू नहीं।
कन्या: एक छोटी बालिका, जो छोटी सी इच्छा पूरी हो जाने पर खिलखिला उठती है और उसकी आँखों में अभूतपूर्व चमक दिखाई देनी लगती है वही आँख जब किसी के प्रति अपना क्रोध प्रकट करती है तो उनसे बच पाना कठिन होता है। बुध की चतुराई यदि मिथुन में दिखाई देती है तो बुध का भोलापन कन्या की आँखों में देखा जा सकता है। एक ऎसा राजकुमार जो प्यार से बहलाने पर बहल जाए और क्रोध में बिफर कर सबकुछ तहस-नहस कर डाले। अपनी ओर आकर्षिक करने की कला भी इन आँखों से सीखी जा सकती है। जो आँखें सिखाने में समर्थ हैं, उनके सौन्दर्य का गुणगान भला कैसे ना किया जाए।
तुला: संयत भाव हरदम आँखों में रहें, एक दृष्टि से देखने की कोशिश की जाए तो सामने वाला आसानी से समझ ले कि मानों वही सब कुछ है, यह एहसास दिलाना तुला की आँखों में आसानी से पढ़ा जा सकता है। यदि सामने दस व्यक्ति बैठे हैं और किसी एक परिणाम की अपेक्षा में हैं तो सभी ये महसूस करेंगे कि उन्हीं के साथ न्याय होगा, उन्हीं के पक्ष में बात जाएगी, इसको बखूबी पढ़ा जा सकता है।
वृश्चिक: वृश्चिक राशि के व्यक्ति की आंखों में गहराई होती है जिसकी थाह पाना लगभग नामुमकिन होता है। वृश्चिक राशि की आंखें बेहद अभिव्यक्त होती हैं। जल तत्व राशि होने से एक अलग सी चमक दिखाई देती है। प्यार, गुस्सा, नफरत सभी भावनाएं इनकी आंखों में एकदम साफ परिलक्षित होती हैं परन्तु यदि वृश्चिक राशि का व्यक्ति न चाहे तो आंखों में कोई भाव दिखाई नहीं देगा भले ही दिल में ज्वार भाटा उठ रहा हो, अपने भावों को यूं छुपा ले जाना और दूसरों के सामने सामान्य दिखाई देना, इसे केवल और केवल सौन्दर्य ही कहा जा सकता है कि ज्वार तो उम़ड-घुम़ड रहा है, मन में बेचैनी है परन्तु आंखें कुछ और बयां कर रही हैं।
धनु: धनु राशि की आंखों में दृढ़ आत्मविश्वास की झलक देखने को मिलती है। इन लोगों से बहुत देर तक आंखों में आंखें डालकर बात करना मुश्किल होता है क्योंकि इनका आत्मविश्वास प्राय: सामने वाले के विश्वास को डिगा देता है। कभी-कभी आत्मविश्वास की कठोरता, कोमल भावनाओं को आंखों से प्रकट नहीं होने देती। प्राय: इनकी वाणी और आंखों के भाव विरोधाभासी होते है जिस कारण लोग इन आंखों की कठोरता को तो महसूस कर पाते हैं परन्तु जो कोमल भावनाएं अपनी ज़डों से जु़डी रहने की होती हैं और स्नेह के भाव को दिखा नहीं पातीं इसलिए कई बार इनको गलत समझ लिया जाता है और ये लोगों की बेरूखी का शिकार भी हो जाते हैं।
मकर: मकर राशि पृथ्वी तत्व राशि है। एक ठहराव सा दिखता है इनकी आंखों मे। इनकी आंखों में उत्साह की कमी रहती है। मकर राशि के व्यक्ति में कितनी ही महत्वाकांक्षा हो परन्तु संतोष भी बहुत अधिक होता है जो उनकी आंखों मे दिखता है। इनके करीबी प्राय: इनसे शिकायत करते हैं कि ये अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाते।
कुंभ: कुंभ अत्यन्त शुभ राशि है। कुंभ राशि के व्यक्ति की आंखों मे भाव बहुत तेजी से बदलते हैं। इनमें एक प्रमुख गुण होता है कि यदि ये चाहें तो चेहरे को सपाट और आंखों को भावहीन कर लेते हैं। यद्यपि यह कार्य ये इतनी चतुराई से नहीं कर पाते जितनी चतुराई से वृश्चिक राशि वाले कर लेते हैं। इनका करीबी व्यक्ति आंखों की किनारी में असल भाव आसानी से पढ़ सकता है।
मीन: इनकी जुबान से अधिक इनकी आंखें बोलती हैं। प्रेम, दया, करूणा के भाव इनकी आंखों मे सजीव हो उठते हैं। अन्य भाव भी आसानी से पढ़े जा सकते हैं परन्तु उनकी गहराई का अनुमान लगाना मुश्किल होता है। मीन राशि का व्यक्ति कितनी भी सफाई से झूठ बोले परन्तु यदि आंखों को गौर से देखा जाए तो इनका झूठ आसानी से पक़डा जा सकता है। जल राशि होने के कारण जल सैलाब सदा इनकी आंखों मे तैरता है और प्राय: बांध तो़डकर यह सैलाब गालों पर ढुलक जाता है।

आभार व्यक्त एस्ट्रोबलैसिंग डॉट कॉम

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मुजफ्फरनगर। विवादित रियलिटी शो “राखी का इंसाफ” में एक शादी शुदा युवती का फिर से विवाह करा दिए जाने को लेकर विवाहित महिला के पूर्व पति नरेन्द्र सिंह ने कार्यक्रम की संचालक राखी सावंत, एनडीटीवी चैनल सहित सात अन्य लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है।

उपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्योत्सना सिंह ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए तीस नवंबर की तारीख निर्धारित की है। मुकदमा दायर करने वाले नरेन्द्र सिंह ने बताया कि 13 नवंबर 2010 को रियलिटी शो के दौरान जिस महिला का विवाह देव भारद्वाज नाम के व्यक्ति से करा दिया गया वह पहले से ही उसके साथ विवाहित है। गौरतलब है कि नरेन्द्र सिंह और सुनीता सिंह की शादी सात अगस्त 2003 को हो चुकी है और तब से वह पति पत्नी के रूप में रह रहे हंै। इस शो में विवाहित महिला की किसी दूसरे पुरूष के साथ शादी कराए जा को लेकर नरेन्द्र सिंह ने चैनल और राखी सावंत के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

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पिछले सात सालों में 30 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय कर चुके अभिनेता जॉन अब्राहम कहते हैं कि दर्शक अब उन्हें और उनके यथार्थवादी अभिनय को ज्यादा समझते हैं। वे जल्दी ही निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखना चाहते हैं।

जॉन ने आईएएनएस से एक साक्षात्कार में कहा, “”मेरे इर्द-गिर्द अच्छे मित्र हैं जो निर्देशक और लेखक हैं। वे मेरे साथ बैठना, मेरी मदद करना और पटकथाएं लिखना चाहते हैं। मेरे दिमाग में कहानियां हैं और मैं जल्दी ही निर्देशक बनना चाहता हूं और जब ऎसा होगा तो मैं इस क्षेत्र में अच्छा करूंगा।”" अगले महीने 38 साल के होने जा रहे जॉन ने कहा, “”पांच से आठ साल बाद मैं एक फिल्म का निर्देशन करूंगा। मैं अभी मनोरंजन उद्योग में केवल सात साल पुराना हूं। मैं सबसे पहले खुद को स्थापित और साबित करना चाहता हूं और उसके बाद में निर्देशन के क्षेत्र में जाऊंगा।”" जॉन ने सभी शैलियों की फिल्मों में काम किया है। उन्होंने ऑस्कर के लिए नामांकित हुई “वाटर” से लेकर “गरम मसाला”, “दोस्ताना” और “न्यूयार्क” जैसी फिल्मों में भी काम किया है।

उन्होंने कहा, “”इन सालों के दौरान मुझे लगता है कि मैं सिनेमा माध्यम के प्रति ज्यादा सहज हो गया हूं लेकिन मैं खुद से ज्यादा दर्शकों की मेरे प्रति समझ में बदलाव देख रहा हूं।”" जॉन कहते हैं कि उनमें बदलाव नहीं हुआ है, वे अब भी केवल अपने निर्देशक के निर्देशों का पालन करते हैं लेकिन उनके प्रति लोगों की समझ बदली है। इन दिनों वे तमिल फिल्म “काखा काखा” के हिंदी संस्करण में काम करने में व्यस्त हैं। निशिकांत कामत के निर्देशन में विपुल शाह इस फिल्म का निर्माण कर रहे हैं। जॉन के साथ अभिनेत्री जेनीलिया डीÞसूजा भी इसमें अभिनय कर रही हैं। फिल्म का 20 प्रतिशत हिस्सा शूट हो चुका है और जनवरी के अंतिम दिनों तक इसकी शूटिंग पूरी हो जाएगी।

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नई दिल्ली। हॉलीवुड की सबसे हॉट ब्यूटी पामेला एंडरसन की रियलिटी शो बिस बॉस-4 में धमाकेदार एंट्री हुई है। बिग बॉस के घर में पहुंचते ही पामेला ने सभी को नमस्ते भी किया। पामेला एक दिन पहले ही बिग बॉस के घर में पहुंची और वहां साफ-सफाई का काम कर रही हंै और परांठों का स्वाद चख रही हैं।

शो की प्रतिभागी सीमा परिहार ने नाश्ते में परांठे बनाए थे और उन्होंने उन्हें पामेला के लिए भी परोसा। पामेला ने इस भारतीय भोजन का पूरां आनंद लिया। पामेला बिग बॉस के घर की साफ-सफाई में भी शामिल हुई और उन्होंने झाडू उठाई और फर्श बुहारना शुरू कर दिया। पामेला की एंट्री से प्रतियोगी कुछ वक्त के लिए विवाद भूल गए थे लेकिन जैसे ही पामेला बिग बॉस के गेस्ट रूम में गई फिर से जंग शुरू हो गई। पामेला की बिग बॉस में प्रवेश पर घर के कुछ लोग काफी उत्साहित हैं। रिशांत और अष्मित पामेला को घर पाकर इम्प्रेस करने में लगे हैं और वीणा मलिक और सारा खान से भी दूर दूर दिखाई दे रहे है।

सूत्रों के अनुसार पामेला के जलवे गुरूवार को प्रसारित होने वाले शो में दिखाए जाएंगे जब पामेला सभी प्रतिभागियों के साथ वजन घटाओं प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी। पामेला एंडरसन ने अपनी चर्चित छवि के विपरीत सफेद साडी, झुमके, चूडी और बिंदी का शृंगार कर भारतीय परिधान में इस शो में प्रवेश किया। बिग बॉस 4 के इस अंक में 43 वर्षीय पामेला याना गुप्ता के आइटम सांग बाबूजी जरा धीरे चलो गाने के बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ दाखिल हुई। पामेला इस शो में तीन दिन के लिए शामिल हुई है। वे भारत पहली बार आई हंै। पामेला ने होम इम्प्रूवमेंट और वी आई पी जैसी टीवी शृंखलाओं में भी अभिनय किया है। उन्होंने सामाजिक कार्यो में अपनी अंतर्राष्ट्रीय ख्याति का बखूबी इस्तेमाल किया है। पामेला बिग बॉस में शामिल होने वाली पहली अमेरिकी नागरिक हैं।

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nullरियलिटी शो बिग बॉस में पाकिस्तानी खूबसूरत और सेक्सी कलाकर वीना मलिक जब बाथरूम से बाहर तौलिये में आई तो उनका तौलिया कपडे़ चेंज करते समय सरक गया। जब यह हुआ तो वीना कुछ समझ नहीं पाई।

वैसे ऎसा होते हुए सिर्फ बिग बॉस के कैमरे ने ही देखा इसलिए जाहिर है, वीना टीवी स्क्रीन पर बेपर्दा होने से बच गई। वीना मलिक ने यह जान-बूझकर किया या यह हादसा था, यह कहना मुश्किल है परन्तु बॉस से इस सीन को हटा दिया गया है। हालांकि बिग बॉस में वीना मलिक कुछ ना कुछ करती रही हैं। वे अश्चिमत पटेल के साथ रोमांस करती हुई भी नजर आई थीं।

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