इन दिनों सलमान का सितारा या यूं कहें उनकी तकदीर अच्छी है जो उनकी फिल्में साल-दर-साल दर्शकों द्वारा सराही जा रही हैं। इन फिल्मों की सफलता से यह तो ज्ञात होता है कि सलमान खान ने अपने दौर में अपना एक अलग दर्शक वर्ग बनाया है जो उन्हें परदे पर हर वो काम करते देखना चाहता है जो कभी सत्तर और अस्सी के दशक का नायक करता था।
सिनेमा से गायब हुए इस नायक को एक बार फिर से परदे पर जीवित करने में सलमान खान ने सफलता पा ली है। 2009 से 2011 के मध्य में उन्होंने वांटेड, दबंग और रेडी के जरिए उस नायक को पुन: बॉलीवुड में स्थापित कर दिया है। फिल्मों में एक बार फिर से एकल नायक का वर्चस्व लौटा है। सितारों की भीड से ऊबी जनता ने सलमान के प्रयास को सराहा है। आज हर निर्माता अपनी फिल्म में सलमान को उसी तरह लेना चाहता है जिस तरह कभी अस्सी के दशक में अमिताभ बच्चन को लिया जाता था। दर्शक पूरे तीन घंटे तक सलमान खान को सहजता के साथ झेलता है। तालियां पीटता, हँसता है और उसके साथ नाचता है।

वांटेड, दबंग और अब रेडी की कामयाबी ने सलमान खान को अजीब आत्मविश्वास से भर दिया है, यह बॉलीवुड के लिए शुभ नहीं है। हवा में तैर रही खबरों के मुताबिक सलमान खान ने दक्षिण भारत की छह हिट फिल्मों के अधिकार खरीद लिए हैं। वे बगैर जोखिम और शर्म के दक्षिण की हिट फिल्मों के रीमेक पर ध्यान दे रहे हैं। उन्हें इस बात की कोई चिन्ता नहीं है कि समीक्षक उनकी फिल्मों के लिए क्या लिखते हैं। फिल्म देखने आने वाले दर्शकों में से 30 प्रतिशत से ज्यादा उनकी स्वयं की आलोचना करते हैं। एक दशक से ज्यादा समय हो गया दर्शकों को तीन-चार नायकों को एक साथ देखते हुए लेकिन ये नायक भी इतने प्रभावी नहीं रहे हैं जितना अब अकेला सलमान छा रहा है।
सलमान खान के बारे में रानी मुखर्जी का कहना है कि सलमान खान बॉलीवुड के रजनीकांत हैं। वे जब स्Rीन पर आते हैं तो तालियाँ और सीटियाँ बजाने का मन होता है। उनकी स्टाइल, संवाद अदागयी, एक्टिंग सीधे दिल को छूती है और लार्जर देन लाइफ किरदार निभाने में उनका कोई सानी नहीं है। यह सलमान का ही कमाल है कि “रेडी” जैसी फिल्मों को भी वे बॉक्स ऑफिस पर इतनी शानदार ओपनिंग दिला देते हैं।
रेडी ने अपने प्रदर्शन के प्रथम सप्ताह में 68 करोड का व्यवसाय करके बॉलीवुड में एक नया इतिहास लिखा है। यदि रेडी में सलमान की जगह कोई दूसरा हीरो होता तो फिल्म एक चौथाई बिजनेस भी नहीं कर पाती। एक स्टार वही होता है जो अपने दम पर खराब फिल्म को भी हिट करा दे और सलमान में यही खासियत नजर आती है। आम जनता उसे देखने के लिए सिनेमाघर में टूट प़डती है और उसे कहानी, स्Rीनप्ले, एक्टिंग से कोई मतलब नहीं रहता है। दरअसल वे अपने पसंदीदा स्टार को देख कर ही इतने खुश हो जाते हैं कि उनके लिए अन्य बातें गौण हो जाती हैं।

सलमान के समकालीन सितारों आमिर या शाहरूख को अपनी हर फिल्म के लिए जबरदस्त मेहनत करना प़डती है। वे नया विषय चुनने में सिर खपाते हैं। फिर अपने किरदार को निभाने के लिए उसके अनुरूप अपने को ढालते हैं। दिन-रात खपते हैं। प्रचार करते हैं तब जाकर सफलता हाथ लगती है। दूसरी और सल्लू की “दबंग”, वांटेड और रेडी जैसी फिल्मों की कहानी में कोई नयापन नहीं है। सैक़डों फिल्में इस तरह की बन चुकी हैं। आजमाए हुए फॉर्मूले इन फिल्मों में भी हैं। अभिनय के नाम पर सलमान जैसे वे हैं वैसे पेश आते हैं। हर किरदार को वे सलमान बना देते हैं और उनकी इसी अदा पर दर्शक लट्टू हो जाते हैं। सलमान इस समय यह बात अच्छी तरह समझ चुके हैं कि दर्शक किस रूप में उन्हें देखना पसंद कर रहे हैं और वैसा ही वे दर्शकों के सामने पेश हो रहे हैं।
दर्शक किरदार को देखने नहीं बल्कि सलमान को देखने आते हैं इसलिए सलमान दबंग, वांटेड या रेडी में एक जैसे नजर आते हैं। बात ज्यादा पुरानी नहीं है जब पार्टनर के बाद सलमान की मेरीगोल्ड, गॉड तुस्सी ग्रेट हो, युवराज, लंदन ड्रीम्स, मैं और मिसेस खन्ना जैसी फिल्में असफल रही थीं। उगते सूरज को नमस्कार करने वाली फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें ढलता हुआ सूरज कहा जाने लगा। कहा गया कि मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखने वाले दर्शकों की रूचि सलमान की फिल्मों में नहीं है क्योंकि उनकी फिल्म में कुछ नयापन नहीं रहता। ये बातें सलमान के लिए टॉनिक साबित हुई। इन आलोचनाओं ने सलमान को अपने करियर के बारे में फिर से सोचने के लिए मजबूर किया।

सलमान ने महसूस किया कि शराब का असर उनके चेहरे पर हो रहा है। जब वे खुद अपना चेहरा देखना पसंद नहीं करते तो जनता क्यों करेगी। सलमान ने तुरंत पीना बंद किया। उसके बाद उन्होंने इस बात पर गौर किया कि उनके प्रशंसक उनसे क्या चाहते हैं। वर्तमान में उसकी बात सुनी जाती है जो ढिंढोरा पीटता है। लिहाजा सलमान को भी प्रचार का महत्व समझ में आया। इसी बीच “वांटेड” के रूप में सफलता उन्हें हाथ लगी और वे समझ गए कि दर्शक किस तरह के किरदार और फिल्म में उन्हें देखना पसंद करते हैं। “दबंग” उनके करियर की ब़डी हिट फिल्मों में से एक साबित हुई और सलमान ने जोरदार वापसी की। उनके प्रशंसक खुश हुए और कई नए प्रशंसक उनसे जु़डे।
अब सलमान ज्यादातर दक्षिण भारतीय फिल्मों के हिंदी रिमेक में काम कर रहे हैं क्योंकि वहाँ पर टिपिकल हीरो अभी भी फिल्मों में जिंदा है। “रेडी” जैसी फिल्म को चलाना केवल सलमान के बूते की ही बात है। भले ही सलमान को अवॉर्ड ना मिलते हों। नंबर वन नहीं कहा जाता हो। लेकिन लोगों के प्यार का पुरस्कार किसी भी अवॉर्ड से ब़डा है।
सलमान खान की दबंग को वर्ष 2010 का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना इस बात का संकेत है कि देश के हर कोने से सलमान को समर्थन मिला। हर उस व्यक्ति ने दबंग को सराहा जो मनोरंजन के उद्देश्य से सिनेमा हॉल में जाता है। दबंग के बाद रेडी की सफलता निश्चित तौर पर दबंग का हैंग ओवर है जो दर्शकों के सिर पर चढा हुआ था। बॉलीवुड का यह दबंग सितारा कितना दर्शकों के बीच प्रसिद्ध है इसका पता हमें उनकी आने वाली फिल्मों से चलेगा जो इस वर्ष के अन्त से प्रदर्शित होना शुरू होंगी। सम्भवत: इस वर्ष के अन्त में उनकी बॉडीगार्ड आएगी जिसमें उनके साथ करीना कपूर हैं। इसके बाद उनकी यश चोपडा बैनर की पहली फिल्म एक था टाइगर के आने की सम्भावना है।
कबीर खान के निर्देशन में बनने जा रही इस फिल्म की भी अभी से बॉलीवुड में चर्चा है। इसके अतिरिक्त उनके भाई सोहेल खान की प्रस्तावित शेरखान, अरबाज खान की दबंग का सीक्वल दबंग-2, अनीस बज्मी की बोनी कपूर द्वारा निर्मित नो एंट्री का सीक्वल नो एंट्री-2 ऎसी फिल्में हैं जो यह तय करेंगी कि क्या भारतीय दर्शक उम्र के पके हुए पडाव पर पहुंचे इस नायक को अभी भी 25 वर्षीय नायिका के साथ नाचते हुए देखना पसन्द कर सकती है। अगर इन फिल्मों में से कोई भी एक फिल्म दबंग या रेडी जैसा कमाल दिखाने में कामयाब होती है तो निर्विवाद रूप से यह कहा जा सकता है कि सलमान खान को दर्शक सिर्फ सलमान के रूप में ही देखना चाहता है। वे वास्तविक जिन्दगी में जैसे हैं वैसे ही परदे पर नजर आते हैं। उम्मीद करनी चाहिए कि आने वाले दो-तीन साल तक सलमान परदे पर दर्शकों को खुश करते नजर आएंगे।
सलमान-सलमान ही नजर आते हैं परदे पर
जून 24, 2011 khaskhabar द्वारा