जून 21, 2011 रात के साढे दस बजे बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन ने अचानक टि्वटर पर लिखा, न्यूज! न्यूज!! न्यूज!!! मुझे अभी-अभी समाचार मिला है कि मेरी पुत्रवधू ऎश्वर्या मां बनने वाली हैं और मैं दादा बनने वाला हूं।
इस समाचार को आप अब दुनिया भर में फैला दीजिए। हर आम महिला की तरह ऎश भी मां बनने जा रही हैं इसमें कोई बडी बात नहीं थी लेकिन ऎश्वर्या के श्वसुर अमिताभ बच्चन ने इस खबर को सारी दुनिया को सुनाकर न केवल स्वयं को सुर्खियों में चर्चित किया अपितु अपनी पुत्रवधू के गिरते हुए ग्राफ को भी फिर से बडी तेजी के साथ ऊपर लाने में अहम् भूमिका निभाई। वर्तमान में बच्चन परिवार की यह बहू अपने होने वाले बच्चे के कारण चर्चा में है।

आइए एक नजर डालते हैं ऎश्वर्या राय बच्चन के उस करियर पर जहां पर वे सिर्फ और सिर्फ ऎश्वर्या राय ही थीं, बच्चन नहीं बनीं थी। एक नवम्बर, 1973 को भारत के कर्नाटक राज्य के मंगलौर शहर में एक रूढिवादी दक्षिण भारतीय परिवार में ग्रीन-ग्रे शेड आँखों वाली लडकी का जन्म हुआ। इस लडकी का नाम उसके माता-पिता द्वारा ऎश्वर्या रखा गया। किशोरावस्था में मॉडलिंग को पार्ट टाइम जॉब के रूप में स्वीकारने वाली इस मॉडल ने कभी सपने में नहीं सोचा था कि वह अपनी सुन्दरता के बलबूते पर विश्व पटल पर इस कदर छायेगी कि लोग उसके दीवाने हो जाएंगे और वह सुन्दरता के बलबूते पर विश्व पर राज करेगी।

मॉडलिंग में आने से पहले ऎश्वर्या राय का सपना एक वास्तु शिल्पकार बनने का था। ऎश्वर्या राय ने मॉडलिंग की दुनिया में महिमा चौधरी के साथ पेप्सी की विज्ञापन फिल्म में काम किया। 1994 में ऎश्वर्या राय मिस इंडिया की रनर अप रहीं। इसी वर्ष उन्होंने विश्व में अपनी सुन्दरता का डंका बजवाया और वे मिस वल्र्ड चुनी गई। इस पुरस्कार को पाने के बाद ऎश्वर्या राय के पास फिल्मों में काम करने के प्रस्तावों का ढेर लग गया।

बॉलीवुड में उन्होंने 1997 में प्रवेश किया। उनकी पहली हिन्दी फिल्म राहुल रवैल के निर्देशन में बनी बॉबी देओल के साथ और प्यार हो गया थी। इस फिल्म का संगीत पाकिस्तान के मशहूर सूफी गायक फतेह अली खान ने दिया था। फिल्म में दर्शकों ने ऎश्वर्या राय को सराहा। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट नवागंतुक का पुरस्कार मिला। इसके बाद उनकी दक्षिण के निर्देशक शंकर की जींस आई। इस फिल्म का एक गीत आठवां अजूबा . . .ऎश्वर्या को देखकर ही लिखा गया था।
बॉलीवुड में 1999 ऎसा रहा जब इस अभिनेत्री ने अपनी अभिनय क्षमता को इतनी शिद्दत के साथ परदे पर पेश जिसे देखकर न सिर्फ दर्शकों ने बल्कि बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशकों ने भी दांतों तले उंगली दबा ली थी। फिल्म थी निर्देशक संजय लीला भंसाली की हम दिल दे चुके सनम जिसमें उन्होंने अजय देवगन की पत्नी की भूमिका के साथ-साथ सलमान खान की प्रेयसी की भूमिका भी अभिनीत की थी। इस फिल्म के लिए ऎश्वर्या को बहुत से पुरस्कार प्राप्त हुए थे।

हम दिल दे चुके सनम की प्रेयसी की भूमिका ऎश्वर्या राय की जिन्दगी में एक वास्तविकता बन गई। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान वे सलमान खान के इश्क में हिचकोले लेते हुए अपने करियर के साथ-साथ अपनी आँखों में एक सुन्दर सा सपना पालने लगी थीं। ऎश्वर्या राय और सलमान खान की प्रेम कहानी इस फिल्म के प्रदर्शित होने तक इतनी ज्यादा परवान चढ चुकी थी कि दर्शक जब यह फिल्म देखने आया तो उन्हें पूरी तरह से सलमान और ऎश्वर्या के प्रेम दृश्यों में वास्तविकता नजर आई। अगर आप लोगों के जेहन में इस फिल्म के कुछ दृश्य ध्यान हों तो याद कीजिए एक दृश्य-कमरे में झूमर की बत्तियों को जलाने के लिए आई ऎश्वर्या ज्यों ही बत्ती जलाती हैं उनकी गहरी हरी आंखों के सामने मुस्कराता हुआ सलमान खान का चेहरा नजर आता है। ऎश्वर्या की आंखों में सलमान के प्रति उमडे प्रेम को निर्देशक संजय लीला भंसाली ने कुछ क्षणों की बजाय मिनटों का कर दिया और प्रेम की भावाभिव्यक्ति वाले इस दृश्य ने दर्शकों के जेहन में मुगल-ए-आजम के उस दृश्य की याद ताजा कर दी जिसमें दिलीप कुमार मोर पंख से मधुबाला के चेहरे पर आई लट को धीरे-धीरे हटा रहे जिससे मधुबाला की नींद न टूटे। दिल दे चुके सनम का ऎसा ही एक और दृश्य था जहां ऎश्वर्या राय झूले पर लेटी हुई अपनी मां से जोर से चीखते हुए कहती हैं हां मैं उसे प्यार करती हूं। मैं उससे इश्क फर्माती हूं। तुम ये बात चाहो तो पिताजी को बता सकती हो। उस वक्त ऎश्वर्या के चेहरे पर आई भावाभिव्यक्ति ऎसी थी जैसे वे वास्तव में अपनी मां के सामने इस बात को कबूल करती हैं कि वे सलमान खान से प्यार करती हैं।

बॉलीवुड में इसके बाद सलमान और ऎश्वर्या राय के बीच झगडों के समाचार भी चटकारे लेकर पढे और सुने गए। हम दिल दे चुके सनम के बाद ऎश्वर्या राय ने हमारा दिल आपके पास है, मोहब्बते, ताल, देवदास, धूम, गुरू, रेनकोट आदि कई फिल्मों में काम किया। 1999 में आई सुभाष घई की ताल में फिर एक बार दर्शकों ने ऎश्वर्या राय की आंखों में प्रेम की इंतहा को देखा। इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा सलमान के साथ अपने इश्क को लेकर चर्चा में रही ऎश्वर्या के लिए वर्ष 2002 एक नई सौगात लेकर आया। जिसे संजय लीला भंसाली ने ही बनाया था, नाम था- देवदास। इस बार उनके नायक थे शाहरूख खान। पारो की भूमिका में ऎश्वर्या ने वो जादू जगाया जिसने उन्हें हिन्दुस्तान के साथ-साथ विदेशों में भी लोकप्रिय बनाया।

देवदास भारत की पहली ऎसी फिल्म थी जिसे उस वर्ष के कान फिल्म समारोह में प्रदर्शित किया गया था और जहां से ऎश्वर्या राय को विश्व स्तर की अभिनेत्री होने का मुकाम हासिल हुआ था। इसकी एक सबसे बडी वजह यह थी कि इस फिल्म में अपने प्रेमी से विरह की पीडा को ऎश्वर्या राय ने वास्तविकता के साथ अभिव्यक्त किया जैसे वे इस विरह पीडा को झेल रही हों। यह सच भी था उन दिनों ऎश्वर्या राय का सलमान खान के साथ ब्रेकअप हो चुका था। वे सलमान को भुलाने के लिए स्वयं को ज्यादा से ज्यादा व्यस्त रखना चाह रही थी। सलमान खान के बाद ऎश्वर्या राय का नाम अभिनेता सुरेश ओबेराय के पुत्र विवेक ओबेराय से जुडा। इन दोनों की प्रेम कहानी ने भी बॉलीवुड में अच्छी खासी प्रसिद्धि पाई। ऎश्वर्या के प्रेम में विवेक ने सलमान खान और उनके भाईयों अरबाज और सोहेल खान तक से पंगा ले लिया। नतीजा विवेक के लिए बुरा रहा। उनका उगते हुए सूर्य की भांति करियर एक ही दिन में ढलते हुए सूरज में बदल गया। साथ ही ऎश्वर्या राय का साथ भी छूट गया। इन्हीं दिनों में विवेक ओबेराय के साथ उनकी एक फ्लॉप फिल्म क्यों हो गया ना का प्रदर्शन हुआ था जिसे दर्शकों ने अस्वीकार कर दिया। (जारी है)….