फिल्म समीक्षा
कलाकार : अजय देवगन, काजल अग्रवाल, प्रकाश राज, सोनाली कुलकर्णी, सचिन खेडकर
निर्माता : रिलायंस एन्टरटेनमेंट
निर्देशक : रोहित शेट्टी
मुम्बईया फिल्मों में सत्तर और अस्सी के दशक के नायक की सफलतापूर्वक वापसी हो रही है। इस नायक को परदे पर पुनर्जीवित करने में सलमान खान की विशेष भूमिका रही है जिन्होंने दक्षिण भारत में सिमटे इस नायक को मुम्बइया फिल्मों में वापस प्रवेश कराया। इस सप्ताह प्रदर्शित हुई निर्देशक रोहित शेट्टी की अजय देवगन अभिनीत सिंघम इस सिलसिले को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने में सहायक होगी इसमें कोई शक नहीं है। वाण्टेड, दबंग, रेडी, बुड्ढा होगा तेरा बाप की सफलता के बाद अब सिंघम की सफलता से आने वाले समय में एकल नायक फिल्मों को देखना अच्छा लगेगा।
सिंघम की कहानी ईमानदार पुलिस अधिकारी बाजीराव के इर्द-गिर्द घूमती है। बाजीराव एक ईमानदार और कत्तüव्यपरायण अधिकारी है, जो अन्याय और भ्रष्टाचार के विरूद्ध लडता है। इसी सिलसिले में उसकी टक्कर एक ताकतवर भ्रष्ट राजनेता जयकांत (प्रकाशराज) से होती है। अपने अपमान का बदला लेने के लिए जयकांत बाजीराव का तबादला अपने शहर गोवा में करा देता है, जहां उसका अपना एक वजूद है, दबदबा है।
इस कथानक के साथ-साथ फिल्म में बाजीराव और काव्या (काजल अग्रवाल) की प्रेम कहानी भी चलती रहती है। इसके साथ ही कथानक में रोचक मोड के रूप में सोनाली कुलकर्णी का किरदार है, जिससे मिलने के बाद फिल्म की पटकथा में इतनी कसावट आती है, जो दर्शकों के दिमाग को अपने मोहपाश में बांध लेती है। निर्देशक रोहित शेट्टी की सिंघम अपनी शुरूआत में सलमान खान की दबंग की याद ताजा करती है।
इस फिल्म का शीर्षक गीत सिंघम-सिंघम भी वैसा ही है जैसा दबंग का हुड-हुड दबंग था। सिंघम रिलायंस एंटरटेनमेंट की तमिल में बनी सिंघम का रीमेक है, जिसमें वहां के सुपर सितारे सूर्या ने सिंघम की भूमिका को निभाया, यहां इसी भूमिका को अजय देवगन ने बडी विश्वसनीयता और असरकार तरीके से पेश किया है।
तारीफ करना चाहेंगे दक्षिण के बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता प्रकाश राज की जिन्होंने अपने किरदार में अभिनय के विभिन्न रंगों से दर्शकों को परिचित कराया है। इन दिनों बॉलीवुड में प्रकाश राज की मांग बढने लगी है। वाण्टेड से हिन्दी फिल्मों के एकल खलनायक के रूप में प्रसिद्धि होने वाले प्रकाश राज सिंघम में अपनी अदाकारी से अमरीशपुरी की याद ताजा कर जाते हैं। हिन्दी फिल्मों में छह साल बाद पुनर्वापसी करने वाली काजल अग्रवाल यहां सुन्दर जरूर लगी हैं लेकिन उन्हें किरदार को रोहित ने सीमित रखा है। अजय देवगन के साथ वाले दृश्यों में वे उनके अनुरूप नहीं लगती हैं। हालांकि वे ग्लैमरस लगी हैं। कलाकारों के उम्दा अभिनय के साथ-साथ फिल्म के संवाद रोचक हैं।
रोहित शेट्टी ने अजय देवगन से काफी संवाद मराठी में बुलवाये हैं, जो दर्शकों के समझ से बाहर हैं लेकिन अजय के चेहरे पर आने वाले भावों को देखकर दर्शक उन संवादों पर तालियां बजाता है और तारीफ में कसीेदे पढना शुरू करता है।
निर्देशक ने मध्यान्तर तक सिंघम को इसी विषय पर बनी अन्य फिल्मों की तरह रखा है लेकिन मध्यान्तर के बाद उन्होंने सिंघम को अपराध, राजनेता और पुलिस के साथ प्रभावशाली रूप में पेश किया है। पूर्वार्द्ध में जहां दर्शक स्वयं को कुछ ढीला महसूस करता है मध्यान्तर के बाद वह कमर को कसकर एकटक फिल्म देखता है और खत्म होने के बाद भी कुछ क्षणों के लिए अपनी सीट छोडने में स्वयं को असमर्थ पाता है।
यह निर्देशकीय कमाल है जिसने आजमाए हुए फार्मूले पर नए तत्वों का इस खूबी के साथ समावेश किया है, जो दर्शकों को अपने साथ बहा ले जाता है। फिल्म के एक्शन दृश्यों को अजय देवगन ने विश्वसनीयता के साथ परदे पर पेश किया है और इसमें उनके शारीरिक सौष्ठव ने महžवपूर्ण भूमिका निभाई है। छायांकन अच्छा है। गोवा की सुन्दरता को जिस खूबी से रोहित अपनी हर फिल्म में दिखाते आए हैं, यहां भी उन्होंने अपने कैमरामैन से अच्छा काम करवाया है। फिल्म का संगीत मराठी फिल्मों के संगीतकार अजय अतुल ने दिया है जो बेअसर है, केवल टाइटल गीत दर्शकों को पसन्द से ज्यादा दबंग के टाइटल गीत की याद दिलाता है। परदे पर परोसी जा रही अश्लील फिल्मों के बीच में सिंघम को जिन्दगी ना मिलेगी दोबारा के बाद पूरे परिवार के साथ बैठकर चैन से देखा जा सकता है।
-राजेश कुमार भगताणी
सिंघम : दहाड में है दम
जुलाई 28, 2011 khaskhabar द्वारा