आठवें आश्चर्य की तरह रहा है बॉलीवुड के लिए इस साल जुलाई का महीना। देश भर के मल्टीप्लेक्सेस और बॉक्स ऑफिस के लिए ये महीना कमाई देने वाला साबित हुआ है। जुलाई माह में प्रदर्शित हुई बडे बैनर्स की तकरीबन सभी फिल्मों ने रिकॉर्ड तोड कमाई कर बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई।

माह की शुरूआत 1 जुलाई को आमिर खान प्रोडक्शन की डेल्ही बैली और अमिताभ बच्चन की बुड्ढा होगा तेरा बाप की सफलता के साथ हुई। एक तरफ जहां बुड्ढा को परिवार वालों ने पसन्द किया वहीं आमिर खान की डेल्ही बैली को युवाओं ने सिर माथे पर बिठाया।
इन फिल्मों की सफलता के बाद 8 जुलाई को महेश भट्ट की मोहित सूरी निर्देशित व इमरान हाशमी अभिनीत मर्डर-2 ने कमाई के मामले में इन दोनों सितारों को पीछे छोडा। मर्डर-2 ने पहले सप्ताह में 40 करोड का व्यवसाय करके नया आयाम स्थापित किया। यह इमरान हाशमी के करियर की पहली ऎसी फिल्म रही जिसने प्रथम सप्ताह 30 करोड के आंकडे को छुआ था। मर्डर-2 के साथ ही सलमान खान व यूटीवी की चिल्लर पार्टी का प्रदर्शन हुआ था। कथा-पटकथा, संवाद व अभिनय में चिल्लर पार्टी सशक्त दस्तावेज की तरह थी लेकिन स्टार कास्ट की कमी की वजह से यह बॉक्स ऑफिस पर कोई चमत्कार नहीं दिखा पाई।

15 जुलाई को भारत में दो बडी फिल्मों का प्रदर्शन हुआ। ऋतिक रोशन, फरहान अख्तर, अभय देओल, कैटरीना कैफ, कल्की कोचलीन के शानदार अभिनय से सजी निर्देशिका जोया अख्तर की फिल्म जिन्दगी मिलेगी ना दोबारा और हॉलीवुड की पिछले दस साल से चल रही हैरी पॉटर सीरीज की अन्तिम फिल्म ने दर्शकों की भारी भीड को सिनेमा हॉल की ओर आकर्षित किया। इन फिल्मों ने कहीं-कहीं तो 100 प्रतिशत तक कमाई की।

22 जुलाई को प्रदर्शित हुई निर्देशक रोहित शेट्टी की सिंघम एक एक्शन प्रधान फिल्म है जिसमें नायक की भूमिका अजय देवगन ने निभाई। अजय देवगन की यह रोहित शेट्टी के साथ लगातार पांचवीं फिल्म है। जमीन से शुरू हुआ इन दोनों का सफल सफर रोहित की आने वाली फिल्म बोल बच्चन तक जारी है। सिंघम ने प्रथम सप्ताह अपने बूते दर्शकों को जोडा लेकिन दूसरे सप्ताह में उसे किसी बडी फिल्म के प्रदर्शित न होने का फायदा जरूर मिलेगा। कमोबेश यही स्थिति जोया अख्तर की जिन्दगी मिलेगी ना दोबारा की भी रहने वाली है। माउथ पब्लिसिटी के दम पर हाउसफुल जा रही इस फिल्म को तीसरे सप्ताह भी सत्तर से अस्सी प्रतिशत दर्शक मिलने की उम्मीद है।

29 जुलाई को देश के कुछ बडे फिल्म सेन्टरों पर चुनींदा फिल्मों का प्रदर्शन हुआ लेकिन इन फिल्मों की सफलता या विफलता को आंकना उलझन भरा काम है। निर्देशक अजय सिन्हा की खाप को हरियाणा में विरोध का माहौल मिल रहा है। इस लो प्रोफाइल फिल्म को उसके विरोध के कारण ही पहले दिन दर्शकों की बडी संख्या का मिलना सफलता की गारंटी माना जा रहा है। वहीं आम फार्मूला फिल्मों से हटकर बनी गांधी टू हिटलर अलग विधा की फिल्म है। इस तरह की फिल्में हिन्दी में तो पहले कभी बनी नहीं हैं। गांधी व हिटलर सरीखे दो विचारों और व्यक्तित्वों की समानान्तर कहानी गढना लेखक निर्देशक की नई कोशिश है। इस अछूते प्रयास के लिए वे बधाई के पात्र हैं। उन्होंने हिटलर और गांधी के विचारों को आमने-सामने रखकर ऎतिहासिक परिप्रेक्ष्य में दिखाने की कोशिश की है व गांधी को ही श्रेष्ठ ठहराया है। कुल मिलाकर इस सप्ताह नई फिल्मों के अभाव के कारण दर्शकों का रूख पिछले चार सप्ताह में प्रदर्शित हुई फिल्मों में से ही किसी की तरफ जाएगा।

जुलाई माह में सफल हुई इन फिल्मों को सबसे ज्यादा यूथ का सपोर्ट मिला। देश में कॉलेज खुलने की वजह से यंगस्टर्स ने ग्रुप में मूवी देखने का आनन्द लिया। साथ ही न्यू कॉलेज गोइंग स्टूडेन्ट्स ने भी कॉलेज की कक्षाओं को बंक कर मूवी देखने का लुत्फ लिया है।
प्रमोशनल एक्टिविटी ने दी संजीवनी
इस साल मार्च-अप्रेल व मई में वल्र्ड कप और आईपीएल के मैच होने की वजह से बडे बैनर्स ने अपनी फिल्में प्रदर्शित नहीं की थी, जो जून और जुलाई माह में प्रदर्शित हुई। जून माह मेे प्रदर्शित सलमान खान की रेडी ने इस सफलता का सूत्रपात किया था। रेडी ने अपने प्रथम सप्ताह में 67 करोड का व्यवसाय करके बॉक्स ऑफिस को जबरदस्त उछाल दिया था। रेडी के सामने निर्माताओं ने अपनी फिल्मों को रोका और जुलाई में एक साथ परदे पर पेश किया। इन फिल्मों के हिट होने के पीछे प्रमोशनल एक्टिविटी मुख्य वजह रही। जुलाई में जो भी फिल्में प्रदर्शित हुई वे बडे बैनर्स और बडे स्टार्स की थी। ऎसे में इन फिल्मों की स्टारकास्ट ने अपनी फिल्मों का जबरदस्त प्रमोशन किया। इस प्रमोशन में सितारों ने विभिन्न चैनलों पर चल रहे कार्यक्रमों में शिरकत की, संवाददाताओं को बुला-बुला कर साक्षात्कार दिए, निर्माता निर्देशक हर छोटे-बडे शहर में फिल्म के नायक-नायिका को लेकर पहुंचे,और तो और फरहान अख्तर ने पूरी स्टारकास्ट के साथ फिल्म की पटकथा की तरह सडक यात्रा के दौरान अपनी फिल्म का प्रमोशन किया अर्थात् हर व्यक्ति ने अपने गले में ढोल डालकर स्वयं ही पीटा और दर्शकों से फिल्म देखने आने की भीख मांगते नजर आये। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि इन फिल्मों की सफलता ने बाजार के महžव को बढावा दिया है। इससे यह सिद्ध होता है कि बाजार में हर चीज बिकाऊ है, जिसका जितना ज्यादा प्रचार उसका उतना ही विक्रय।

उम्मीदों का अगस्त…
आने वाले महीनों में बॉलीवुड बॉक्स ऑफिस पर किस ओर करवट लेता है इसका नमूना 12 अगस्त से मिलने की उम्मीद है। 12 अगस्त को निर्माता निर्देशक प्रकाश झा की अमिताभ बच्चन स्टारर आरक्षण का प्रदर्शन होने जा रहा है। इसके अगले सप्ताह अर्थात् 19 अगस्त को बॉलीवुड के खलनायक संजय दत्त की चतुरसिंह नामक फिल्म प्रदर्शित होने वाली है। बाजार की दृष्टि से देखा जाए तो इसे दर्शकों का टोटा झेलना पडेगा क्योंकि अभी तक इस फिल्म का निर्माता ने प्रचार शुरू नहीं किया है।

बॉलीवुड को सबसे ज्यादा उम्मीदें सलमान खान की 31 अगस्त को प्रदर्शित होने वाली फिल्म बॉडीगार्ड से हैं। बॉलीवुड को उम्मीद है कि सलमान की बॉडीगार्ड उनकी पूर्व फिल्म रेडी की कमाई के आंकडों को पीछे छोड देगी। यह उम्मीद कितनी खरी उतरती है इसका बेसब्री से है इंतजार . . .
-राजेश कुमार भगताणी
जुलाई ने दिलाई बॉलीवुड व बॉक्स ऑफिस को सफलता
जुलाई 30, 2011 khaskhabar द्वारा