सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाला गेम शो “कौन बनेगा करोडपति” कल अर्थात् 17 नवम्बर की रात 10.30 बजे गरिमा और स्वाभिमान के साथ समाप्त हुआ। इस कार्यक्रम को पेश करने वाले अमिताभ बच्चन ने जिस अंदाज में इसे समाप्त किया उससे एक बात साफ हुई कि टीवी पर प्रसारित होने वाले समस्त कार्यक्रमों में उनके जैसा प्रस्तोता कहीं नजर नहीं आता है।”कौन बनेगा करोडपति” इस बार अपने आप में एक मिसाल बनकर उभरा। इस बार इस गेम शो में भारत के उस आम आदमी को अपनी योग्यता और ज्ञान को प्रस्तुत करने का मौका मिला जिसे श्रेष्ठि वर्ग में हमेशा से हीन भावना से देखा गया था। कार्यक्रम के शुरू होने से पूर्व ही इस कार्यक्रम को नाम दिया गया था “कोई इंसान छोटा नहीं होता”, जिसे अमिताभ ने अपने प्रस्तुतिकरण और अपनत्व के द्वारा न सिर्फ सही सिद्ध किया बल्कि उन्होंने प्रतिभागियों से जिस अंदाज, गरिमा और अपनत्व के साथ वार्तालाप किया उससे प्रतिभागियों को यह अहसास हुआ कि वे किसी महानायक या बडी हस्ती के सामने नहीं बल्कि उन्हीं के जैसे आम उस इंसान के सामने हैं जो उनके ही बीच में से निकल कर आज इस मुकाम पर पहुंचा है। यह बात न सिर्फ पुरूष प्रतिभागियों को महसूस हुई बल्कि उन बहू-बेटियों को भी महसूस हुई जिन्होंने इस कार्यक्रम में अपने ज्ञान को बयां किया। 
दूसरी तरफ अगर टीआरपी की बात करें तो पिछले सीजन में सभी रियलटी शो में टॉप पर रहने वाला शो बिग बॉस 5 इस बार अपनी छाप छोडने में नाकामयाब साबित हो रहा है। अमिताभ बच्चन के शो कौन बनेगा करोडपति (केबीसी) के सामने इसकी रेटिंग काफी कम है। टीआरपी रिर्पोट के अनुसार केबीसी अधिकतम रेटिंग पॉइंट्स के साथ टीआरपी रेटिंग के टॉप पर बना रहा और उसने अपनी अन्तिम चार कडियों, जो 14 नवम्बर से प्रसारित होना शुरू हुई थी, उसने टीआरपी रेटिंग में स्वयं को टॉप पर बनाए रखा। कौन बनेगा करोडपति की जितनी तारीफ हुई, वहीं उसकी कई जगहों पर आलोचना भी हुई है। हालांकि यह आलोचना केवल इस कार्यक्रम को लेकर नहीं बल्कि उन समस्त रियलिटी शोज को लेकर है जो जनता से वोट मांगते हैं, जिसमें प्रतिभागियों द्वारा अपने पक्ष में वोट करने के लिए कहा जाता है। कौन बनेगा करोडपति ने इस बात का बहुत शोर मचाया कि केबीसी में आम आदमी करोडपति बन रहा है और ये आम आदमी की जीत है। परंतु सच में अगर देखा जाए तो ये आम आदमी की जीत नहीं, आम आदमी के साथ ठगी है। यह कार्यक्रम का एक दूसरा पहलू भी उभरकर सामने आया है। वह यह रहा कि यह एक कानूनीजामा पहना हुआ सट्टा है, जिसे सरकार की स्वीकृति प्राप्त है।> सरकार ने जुए और सट्टे पर प्रतिबंध लगाया है, मगर ये खेल एक तरह से सट्टा ही था। इस कार्यक्रम में हॉट सीट पर आने के लिए करोडों लोग एसएमएस करते थे। उनमें से लॉटरी जैसी एक प्रक्रिया से चंद लोगों का चुनाव होता था।

क्या ये सट्टा नहीं था। जो लोग हॉट सीट पर बैठकर सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे थे, उनके इस कार्यक्रम में एक और तरह का जुआ शुरू किया गया था जिसे इस कार्यक्रम के निर्माताओं ने नाम दिया “घर बैठे जीतो जैकपॉट” जिसमें किसी भी शहर के किसी एक व्यक्ति के फोन नम्बर को चुनकर उसे लखपति बनाया गया और इस रकम को दोगुना या उससे ज्यादा जीतने के लिए उसे प्रोत्साहित किया जाता रहा एक और अतिरिक्त प्रश्न के द्वारा। इसमें जिन प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया उनमें से कुछ ने पाँच लाख रूपये तक की राशि जीती और कई बिना कोई रकम जीते ही रह गए।इसमें सवाल ऎसा पूछा जाता रहा जिसका कोई भी उत्तर दे सके और फिर मँगाए जाते रहे एसएमएस। एक लाख रूपया मिलता है उसे जिसका चयन सट्टे जैसी प्रक्रिया से होता था। सरकार को धोखा देने के लिए ये खेल जैसा खेल रहा, मगर था पूरी तरह से सट्टा।

अमिताभ की आभा इस खेल को गरिमा प्रदान करती रही, साथ ही अमिताभ की उपस्थिति खेल को रोचक भी बनाती रही। मगर जो बी और सी ग्रेड पत्रिकाओं में आसान सवाल इनामी प्रतियोगिताओं में फँसाने के लिए पूछे जाते हैं, उनसे यह कौन बनेगा करोडपति अलग नहीं रहा। वहाँ भी इनाम का झाँसा होता है और यहाँ भी इनाम का झाँसा रहा। फर्क बस इतना था कि पत्रिकाओं की प्रतियोगिताएँ छोटे पैमाने पर होती हैं और ये बहुत बडे स्तर पर किया जाता रहा। एक आम आदमी को को करोडपति बनते इसलिए दिखाया जा रहा था कि उसके पास आज मोबाइल फोन है। उसके फोन में बैलेंस भी है। मोबाइल रिचार्ज कराना आज पेट में रोटी डालने जैसा जरूरी हो गया है। जीने के लिए पेट में कुछ न कुछ तो डालना ही पडता है उसी तरह आजकल मोबाइल फोन भी बैलेंस से खाली नहीं रखा जा सकता। सारी साजिश आम आदमी के मोबाइल फोन से बैलेंस गायब करने की है।

अगर आप लोगों ने कभी इस तरह के कार्यक्रमों में किसी को वोट किया हो या केबीसी में भाग लेने के लिए फोन कॉल या एसएमएस किए होंगे तो ध्यान होगा कि इन कॉल और एसएमएस की रेट सामान्य से ज्यादा होती हैं। इस बारे में कई तो ऎसे हैं जिनको यह जानकारी भी नहीं होती है कि जो संदेश मैं फोन के जरिए भेज रहा हूं उसके लिए मैं कितना भुगतान कम्पनी को कर रहा हूं। इस तरह के कार्यक्रमों या अन्य रियलिटी शो में प्रतिभागियों द्वारा मांगे जाने वाले वोट के लिए किए जाने वाले एसएमएस पर 3 से लेकर 6 रूपए तक एक एसएमएस के लग जाते हैं। जरा हिसाब लगाइए कि कितने लोग इसे देखते हैं, कितने लोग एसएमएस करते हैं और इसके मुकाबले जो रकम लोग जीतते हैं वो कितनी कम होती है। विज्ञापनों से होने वाली आय तो अपनी जगह है ही। केबीसी ने जिन प्रतिभागियों का चयन किया उनमें हम दो प्रतिभागियों का जिक्र जरूर करना चाहेंगे। कुछ सप्ताह पूर्व इस कार्यक्रम में एक ऎसे प्रतिभागी को भाग लेने के लिए चुना गया जो बोलने में हकलाता था। इस प्रतिभागी ने इस कार्यक्रम में एक बडी रकम को जीतने में सफलता प्राप्त की, दूसरा अन्तिम कडी में इस कार्यक्रम की अन्तिम प्रतिभागी जो पेशे से एक अध्यापिका हैं । इस प्रतिभागी ने बताया कि मेरे पति और मुझे समाज ने बहुत से ऎसे ताने दिए हैं जिनको सुनने के बाद मन में आत्मग्लानि का अहसास होता था लेकिन मेरे पति ने कहा कि तुम्हारी तनख्वाह मेरी तनख्वाह से ज्यादा है इसलिए तुम काम करो और मैं घर सम्भालता हूं। आज वो घर का सारा काम करते हैं और मैं अध्यापन का कार्य करती हूं। मेरी तनख्वाह सिर्फ दो हजार रूपये माहवार है। इसमें से डेढ हजार मुझे किराया देना पडता और पांच सौ रूपये अन्य कार्यो में खर्च हो जाते हैं इसके बाद घर चलाने के लिए मुझे शक्ति न होते हुए भी ट्यूशन पढानी पडती हैं। इन महिला प्रतिभागी ने इस कार्यक्रम में 25 लाख रूपये जीते। लेकिन उनसे जो प्रश्न पूछे गए थे वे इतने आसान थे कि देखने वाले दर्शकों में आठवीं और दसवीं कक्षा के बच्चे ऑप्शन आने से पूर्व ही उसका उत्तर बता रहे थे। ऎसा इसलिए किया गया जिससे यह सिद्ध किया जा सके कि कोई इंसान छोटा नहीं होता और दूसरे जिनमें आत्मविश्वास की कमी हो, वो भी एसएमएस करना शुरू करें और आयोजकों की झोली को पूरी तरह भर दें। यहाँ हम उस इंसान का जिक्र जरूर करना चाहेंगे जिसने इस गेम शो को जीतकर प्रसिद्धि का वो मुकाम हासिल किया जिसकी उम्मीद उसने तो क्या उसकी पिछली कई पीढियों ने नहीं की होगी।

यह शख्स है बिहार के मोतिहारी जिले का सुशील कुमार जो पेशे से कम्प्यूटर ऑपरेटर है, जो माहवार छह हजार रूपया महीना तनख्वाह पाता है। इस प्रतिभागी को सफल बनाने में उन चार लाइफ लाइनों का विशेष योगदान रहा जो हर प्रतिभागी की मदद करने को तैयार थीं। अन्तिम कडी के प्रसारण के वक्त इस शो चार प्रमुख विजेताओं को पुन: कार्यक्रम की शोभा बढाने और आम आदमी का अहसास कराने के लिए बुलाया गया था। यह सारा खेल कानून के दायरे में हुआ है, कानून के लचीलेपन का फायदा उठाया गया है। आम आदमी की जेब खाली करने की इससे बडी साजिश इस देश में शायद ही पहले कभी रची गई हो। इस साजिश में हम लोग भी शामिल हो रहे हैं और इसे सफल बना रहे हैं। हम खुशी-खुशी बलि का बकरा बनने को तैयार हो जाते हैं। इन सब आलोचनाओं के बावजूद एक बात तो सिद्ध ह़ई कि प्राइम टाइम में दर्शक केबीसी को ही देखना पसंद कर रहे थे। मनोरंजन क्षेत्र से जुडे जानकारों के अनुसार शो के प्रजेंटर अमिताभ बच्चन इस शो की सबसे बडी ताकत रहे। केबीसी में बिग बी के आकर्षक एवं मोहक व्यक्तित्व का कोई सानी नहीं था। दूसरी तरफ बिग बॉस सीजन 5 का कॉनसेप्ट बोरिंग साबित हो रहा है। बिग बॉस में इस बार कुछ चेहरों को छोडकर कोई भी जानी पहचानी हस्ती नहीं है, जिनके नाम पर शो के लिए दर्शक जुट सकें। टीआरपी के मामले में बिग बॉस 5 केबीसी से बहुत पीछे है। केबीसी के प्राइम टाइम पर प्रसारित होने के साथ साथ बिग बी का आकर्षक प्रस्तुतिकरण, प्रतिभागियों के प्रति उनका सौम्य व्यवहार इसे और रोमांचक बनाता रहा। प्राइम टाइम में दर्शक अपना समय महिलाओं की फिजूल बहस और झगडे देखने में बर्बाद करना नहीं चाह रहा था बिग बॉस में इसके अलावा कुछ नहीं है। हम देखते हैं कि पूजा मिश्रा झाडू़ पीट रही है, डस्टबीन को लात मार रही है। उनकी बहस महज एक बकवास है और उसमें देखने लायक कुछ नहीं। वहीं दूसरी तरफ केबीसी नॉलेज बढाता रहा। केबीसी में दर्शकों को गेम शो के साथ ही रियल लाइफ स्टोरीज भी देखने को मिलीं। यह सिर्फ अमिताभ बच्चन के व्यक्तित्व की ही बात नहीं थ्री बल्कि केबीसी का यह सीजन जरूरतमंदों के लिए भी रहा। हमने देखा कि किस तरह इस शो में जरूरतमंदों को हॉट सीट पर आमंत्रित करके उनकी आर्थिक मदद की जाती रही। आतंकियों से लोहा लेने वाली जम्मू और कश्मीर की रूखसाना को शो में इसी उद्देश्य से आमंत्रित किया गया था। यह केबीसी का एक मानवीय पक्ष था, जबकि दूसरी तरफ बिग बॉस में प्रतिभागियों के बीच का तनाव दर्शक खुद महसूस करने लगते हैं। वैसे लगभग हर वर्ग के दर्शक केबीसी को बिग बॉस 5 पर तरजीह दे रहे थे।

अमिताभ बच्चन ने जब इस कार्यक्रम के समाप्ति की घोषणा की तो वे स्वयं भी बहुत भावुक हो गए थे। उन्होंने दर्शकों की ओर उन्मुख होते हुए कहा कि, “आज के बाद न मेरे सवाल होंगे, न श्रीमती टिकटिकी जी की तडप होगी और न तालियाँ की गूँज सुनाई देगी। यह सही है कि मैं और आप आमने सामने नहीं होंगे लेकिन आप हमारे दिल में हमेशा रहेंगे। जाने से पहले मैं यह जरूर कहना चाहता हूं कि इस बार मैं बहुत लम्बा ब्रेक नहीं लूंगा, आप लोगों से बहुत जल्द मिलना होगा।” उम्मीद की इसी किरण को देखने अब कौन बनेगा करोडपति के छठे संस्करण की अभी से प्रतीक्षा करने लग गए हैं। दर्शकों को उम्मीद है कि इस कार्यक्रम ने जितनी प्रशंसा और तारीफें इस बार बटोरी हैं उसका अगला संस्करण इसमें इजाफा करेगा और इसके प्रस्तोता अमिताभ बच्चन अपनी सौम्य छवि और अपनत्व को बरकरार रखते हुए प्रतिभागियों से अपना सहज और पितातुल्य व्यवहार दिखाते हुए उन्हें उत्साहित करते हुए नजर आएंगे। आमीन्!
केबीसी : न होंगे प्रश्न, न सुनाई देगी तालियों की गूंज
नवम्बर 18, 2011 khaskhabar द्वारा