कपूर फिल्म परिवार में जन्मी करीना ने अभिनय की शुरूआत साल 2000 में प्रदर्शित हुई फिल्म रिफ्यूजी के साथ की। इस फिल्म में अपने अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल डेब्यू अभिनत्री का पुरस्कार मिला। साल 2001 में, अपनी दूसरी फिल्म “मुझे कुछ कहना है” के प्रदर्शन के साथ ही करीना कपूर को अपनी पहली व्यावसायिक सफलता मिली। इसके बाद इसी साल आई करण जौहर की नाटक से भरपूर फिल्म “कभी खुशी कभी गम” में भी करीना नजर आयीं।
“कभी खुशी कभी गम” उस साल विदेशों में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बन गई और साथ ही करीना के लिए यह तब तक की सबसे बडी व्यावसायिक सफलता थी। 2002 और 2003 में लगातार कई फिल्मों की असफलता और एक जैसी भूमिकाएं करने की वजह से करीना को जबरदस्त नकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलीं, उसके बाद करीना ने एक जैसी भूमिकाओं से बचने के लिए ज्यादा मेहनत वाली और कठिन भूमिकाएं लेना शुरू कर दिया। इस मामले में उनके लिए प्रीतिश नन्दी कम्यूनिकेशन की फिल्म “चमेली” वरदान साबित हुई। “चमेली” में देह व्यापार करने वाली एक लडकी की भूमिका ने उनके करियर की दिशा बदल दी। इस फिल्म में अपने अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर स्पेशल परफोमेंüस अवार्ड मिला।
इसके बाद, फिल्म समीक्षकों द्वारा बहुप्रशंसित फिल्मों गोविन्द निहलानी द्वारा निर्देशित “देव” और संगीतकार से निर्देशक बने विशाल भारद्वाज की फिल्म “ओमकारा” में अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर समारोह में आलोचकों की दृष्टि से दो सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार मिले। 2004 और 2006 के बीच करीना ने फिल्मों में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं करके स्वयं को बहुमुखी प्रतिभा की धनी अभिनेत्री साबित किया। वर्ष 2007 करीना कपूर की जिन्दगी में एक ऎसा मोड लाया जिसने उन्हें बॉलीवुड की सर्वाधिक सफल अभिनेत्रियों की श्रेणी में खडा कर दिया। इस वर्ष करीना कपूर की व्यावसायिक दृष्टि से बेहद सफल रही कॉमेडी-रोमांस फिल्म “जब वी मेट” का प्रदर्शन हुआ।इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी इस फिल्म में पहली बार करीना कपूर बेदह खूबसूरत नजर आई। एक तरफ जहां उनकी खूबसूरती दर्शकों की आंखों को सुहा रही थी, वहीं चुलबुली शोख सिख परिवार की कन्या के रूप में वह दर्शकों को आकर्षित करने में सफल रही।

इस फिल्म में किए अपने अभिनय के लिए करीना कपूर ने एक बार फिर फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार जीता। बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने जबरदस्त व्यवसाय करके करीना कपूर के स्टारडम में बढोतरी की। करीना का जन्म भारत के महाराष्ट्र प्रान्त की राजधानी मुंबई में बसे पंजाबी मूल के कपूर फिल्म परिवार में हुआ। करीना, फिल्म अभिनेता रणधीर कपूर और अभिनेत्री बबीता की सबसे छोटी बेटी हैं। वो अभिनेता और फिल्म निर्माता राज कपूर की पोती और पृथ्वीराज कपूर की परपोती हैं। प्यार से फिल्म उद्योग में “बेबो” के नाम से पुकारी जाने वाली करीना, अभिनेत्री करिश्मा कपूर की बहन और अभिनेता ऋषि कपूर की भतीजी और अभिनेता रणबीर कपूर की चचेरी बहन भी हैं। बॉलीवुड में करीना कपूर को सबसे पहले सुप्रसिद्ध निर्माता निर्देशक राकेश रोशन ने अपने बेटे ऋतिक रोशन के साथ “कहो न प्यार है” के लिए लिया था। इस फिल्म के लिए उन्होंने कई दिनों की शूटिंग भी की थी लेकिन जब उन्हें लगा कि इस फिल्म में राकेश रोशन सिर्फ अपने बेटे ऋतिक पर ही पूरा ध्यान दे रहे हैं उन्होंने इस फिल्म में काम करने से इंकार कर दिया।

इसके बाद उन्होंने फिल्म उद्योग में जे.पी. दत्ता की फिल्म “रिफ्यूजी” के जरिए प्रवेश किया। इस फिल्म के जरिए अमिताभ बच्चन के पुत्र अभिषेक बच्चन अपने करियर का आगाज करने जा रहे थे। युद्ध पर आधारित नाटकीय फिल्म “रिफ्यूजी” भारत और पाकिस्तान की लडाई की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म “रिफ्यूजी” के नाम से जाने जाने वाले एक युवक के इर्द गिर्द घूमती है, जो नागरिकों को अवैध रूप से पकिस्तान सीमा के इस पार और उस पार ले जाया करता था। करीना कपूर ने “नाज” नाम की एक बांग्लादेशी लडकी का किरदार निभाया था जो उस युवक के साथ पाकिस्तान जाने के दौरान उससे प्यार करने लगती है। करीना कपूर के अभिनय को आलोचकों ने खूब सराहा। करीना कपूर को इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म फेयर अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। बॉक्स ऑफिस पर “रिफ्यूजी” सन् 2000 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में पांचवें स्थान पर रही थी।

साल 2001 में करीना कपूर ने तुषार कपूर के साथ सतीश कौशिक, जो बोनी कपूर के लिए अनिल कपूर श्रीदेवी को लेकर “रूप की रानी चोरों का राजा” नामक एक असफल फिल्म बना चुके थे, द्वारा निर्देशित “मुझे कुछ कहना है” में काम किया। “मुझे कुछ कहना है” उस वर्ष की सर्वाधिक कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हुई। हालांकि, इसके बाद करीना कपूर की जो दो फिल्में सुभाष घई की “यादें” और निर्देशक अब्बास मस्तान की “अजनबी” ने बॉक्स ऑफिस पर निराशाजनक प्रदर्शन किया। लेकिन इसी वर्ष उनकी बॉलीवुड के बादशाह खान उर्फ शाहरूख खान के साथ “अशोका” नामक ऎतिहासिक महाकाव्य पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन हुआ। निर्देशक संतोष सिवान के निर्देशन में बनी अशोका आंशिक रूप से मौर्य साम्राज्य के प्रख्यात भारतीय सम्राटों में से एक अशोक महान के जीवन पर आधारित थी।

“अशोका” ने अन्तरराष्ट्रीय वेनिस फिल्म समारोह और 2001 टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के साथ अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर जोरदार तरीके से अपना आगाज किया था। फिल्म में शाहरूख खान की सम्राट अशोक के रूप में केन्द्रीय भूमिका थी और उनके साथ करीना कपूर ने कलिंग की राजकुमारी कौरवाकी की भूमिका अभिनीत की थी। इस फिल्म के लिए करीना कपूर फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित की गई। इसी वर्ष करीना कपूर की अन्तिम फिल्म “कभी खुशी कभी गम” प्रदर्शित हुई। 14 दिसम्बर, 2001 को प्रदर्शित हुई निर्देशक करण जौहर की यह फिल्म बॉलीवुड के भारी भरकम सितारों से भरी थी, जिनमें शामिल थे- अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, शाहरूख खान, काजोल और ऋतिक रोशन। “कभी खुशी कभी गम” उस वर्ष भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी। इस फिल्म के लिए एक बार फिर से करीना कपूर को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। वर्ष 2002 और 2003 के दौरान करीना कपूर की सिर्फ छह फिल्मों का प्रदर्शन हुआ।

इनमें शामिल थीं “मुझसे दोस्ती करोगे” और “जीना सिर्फ मेरे लिए”, “खुशी”, “मैं प्रेम की दीवानी हूँ” और चार घंटे की जे.पी. दत्ता की महायुद्ध गाथा “एल ओ सी कारगिल” – ये सभी व्यावसायिक रूप से असफल साबित हुई। यशराज फिल्म के बैनर तले निर्देशक कुणाल कोहली के निर्देशन में बनी पहली फिल्म “मुझसे दोस्ती करोगे” को देखने के लिए दर्शकों में भारी उत्साह था और वो इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, इसके बावजूद यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा पायी। हलाँकि इस फिल्म ने विदेश में अच्छा कारोबार किया। ऎसा की कुछ सूरज बडजात्या के निर्देशन में बनी फिल्म “मैं प्रेम की दीवानी हूं” के साथ हुआ। घरेलू बाजार में इस फिल्म को जबरदस्त असफलता झेलनी पडी जबकि विदेशों में इस फिल्म ने भरपूर कमाई की। इन फिल्मों की असफलता में करीना कपूर द्वारा किए गए एक से अभिनय का भी बहुत बडा हाथ रहा। आलोचकों को करीना कपूर का अभिनय अमौलिक और दोहराया हुआ सा लगा, जिसने दर्शकों को बहुत कम प्रेरित किया।

समालोचकों द्वारा की गई नकारात्मक टिप्पणियों ने करीना कपूर को संजीदगी के साथ अपने करियर को संवारने के लिए प्रेरित किया और उन्होंने इस तरह की फिल्मों को ठुकराना शुरू कर दिया जिसमें उनका किरदार केवल एक खूबसूरत गुडिया जैसा था, जिसे सिर्फ नायक के साथ पेडों के इर्द गिर्द घूमते हुए गाने गाने थे।
इन नकारात्मक प्रतिक्रियाओं ने करीना कपूर को अलग-अलग तरह के पात्रों को करने की प्रेरणा दी, जिससे आने वाले सालों में उन्होंने पात्रों के अन्तर-तžव को समझना यानि किसी पात्र की जान क्या है ये जानना और उसे अपने अभिनय में उभारना शुरू किया। दो साल के असफल दौर के बाद वर्ष 2004 से करीना कपूर ने गम्भीर फिल्मों में काम करना शुरू किया। इस दौरान प्रदर्शित हुई उनकी फिल्में व्यावसायिक तौर पर असफल रही लेकिन इन फिल्मों ने समीक्षकों द्वारा जबरदस्त सराहना पाई। प्रीतिश नन्दी द्वारा निर्मित और सुधीर मिश्रा द्वारा निर्देशित फिल्म “चमेली” उनके करियर के लिए जबरदस्त फिल्म साबित हुई।
इस फिल्म के बाद बॉलीवुड में करीना कपूर की गिनती प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में की जाने लगी। “चमेली” में करीना कपूर ने एक वेश्या चमेली का किरदार निभाया। इसमें उनके सह कलाकार राहुल बोस थे, लेकिन फिल्म का नाम उनके द्वारा अभिनीत पात्र पर रखा गया था। “चमेली” ने मुख्यत: सकारात्मक समीक्षा हासिल की और करीना कपूर के अभिनय ने उनके लिए फिल्मफेयर विशिष्ट प्रदर्शन पुरस्कार भी अर्जित किया। करीना कपूर ने इस फिल्म में सबकी अपेक्षाओं से परे जाकर और निश्चय ही ख़ुद अपनी अपेक्षाओं से परे जाकर, फिल्म जगत में हर वक्त याद किए जाने वाले कुछ महान् प्रदर्शनों में से एक बेहतरीन प्रदर्शन किया। करीना कपूर ने अपनी आतंरिक प्रतिभा को दर्शाया जो की फिल्मों में बहुत ही मुश्किल से आ पाती है। इसी वर्ष करीना कपूर अमिताभ बच्चनऔर फरदीन खान के साथ गोविन्द निहलानी की समीक्षकों द्वारा बहुप्रशंसित फिल्म “देव” में नजर आई। इस फिल्म में उनकी आवाज में एक गीत भी फिल्माया गया था।

“देव” का कथानक 2002 के फरवरी और मई के महीने में हिंदू और मुसलामानों के बीच गुजरात में हुए दंगों और साम्प्रदायिक हिंसा पर केन्द्रित था। वडोदरा के बेस्ट बेकरी काण्ड की मुख्य गवाह जाहिर शेख पर गढे गए इस किरदार में करीना कपूर ने एक मध्यम वर्गीय मुस्लिम लडकी की भूमिका निभाई जिसका नाम आलिया है और जो दंगों की शिकार बन जाती है। इस फिल्म के लिए करीना कपूर को फिल्मफेयर समीक्षक पुरस्कार मिला और साथ ही साथ अन्य बहुत से समारोहों में उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए नामांकित किया गया। “देव” के बाद उनकी शाहिद कपूर और फरदीन खान के साथ “फिदा” नामक एक ऎसी फिल्म आई जिसमें उन्होंने पहली बार नकारात्मक भूमिका अभिनीत की। इस फिल्म के दौरान शाहिद कपूर और करीना के प्रेम प्रसंगों को मीडिया ने जबरदस्त उछाल दिया था। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर विफल रही, लेकिन करीना कपूर ने अपने अभिनय के लिए सर्वत्र प्रशंसा प्राप्त की।
इस फिल्म के बाद उनकी इस साल सुभाष घई की अब्बास मस्तान के निर्देशन में बनी थ्रिलर फिल्म “ऎतराज” और प्रियदर्शन की कॉमेडी “हलचल” ऎसी फिल्म रही जो 2002 के बाद उनकी बॉक्स ऑफिस पर पहली सफल फिल्म साबित हुई। वर्ष 2005 में करीना की धर्मेश दर्शन के निर्देशन में बनी “बेवफाई”, प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी रोमांटिक ड्रामा, “क्यों कि” और सुनील दर्शन के निर्देशन में बनी अक्षय कुमार,बॉबी देओल और लारा दत्ता के साथ “दोस्ती” में काम किया। इस फिल्म को भारत में सामान्य सफलता मिली लेकिन ब्रिटेन में यह फिल्म 2005 में बॉलीवुड की सबसे ज्यादा कमाने वाली फिल्म रही।
करीना कपूर : बॉलीवुड की सर्वाधिक महंगी छम्मक-छल्लो
नवम्बर 22, 2011 khaskhabar द्वारा