एकता कपूर की फिल्म “द डर्टी पिक्चर” ने बॉक्स ऑफिस पर जिस तरह से एकछत्र राज्य किया उसने बॉलीवुड के बरसों के इस मिथक को तोडने में कामयाबी पायी कि महिला किरदार या नायिका प्रधान फिल्मों को सफलता नहीं मिलती है। ऎसा नहीं है कि बॉलीवुड में पहले नायिका प्रधान फिल्में नहीं बनीं या वे चली नहीं लेकिन उन फिल्मों का अनुपात पुरूषा प्रधान या नायक प्रधान फिल्मों में नगण्य सा रहा है। पूर्ण रूप से नायिका प्रधान फिल्मों को याद करते हुए दिमाग पर जब जोर डालते हैं तो हमें राजकुमार संतोषी की फिल्म “दामिनी” का ध्यान आता है। यह नायिका प्रधान फिल्म थी जबकि इसमें नायक (ऋषि कपूर) और सशक्त सहनायक (सनी देओल) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करायी थी लेकिन आज तक यह फिल्म याद आते ही दिमाग में मीनाक्षी शेषाद्रि का चेहरा सामने आ जाता है। वैसे राजकुमार संतोषी ने इससे पहले महिलाओं की दुर्दशा पर ही बडी-बडी नायिकाओं को लेकर “लज्जा” नामक फिल्म बनाई लेकिन उसे दर्शकों ने ठुकरा दिया था।

रानी मुखर्जी की “लागा चुनरी में दाग” को भी दर्शकों ने नापसंद कर दिया था। खैर…दर्शकों की पसंद का ऊंट किस करवट बैठेगा ये कहना वाकई मुश्किल काम है। असल मुद्दा ये है कि आजकल महिला प्रधान मुद्दों और महिला पात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका वाली फिल्में बडे पैमाने पर व्यावसायिक सिनेमा का हिस्सा बन रह रही हैं और दर्शक इन्हें पसंद भी कर रहे हैं। यहां तक कि “द डर्टी पिक्चर” जैसी बोल्ड फिल्मों तक को युवतियों तथा महिलाओं का खुलेआम समर्थन प्राप्त हो रहा है, जबकि ऎसी किसी भी फिल्म को आज से कुछ साल पहले तक देखने का अधिकार केवल पुरूषों के पास था। आज थियेटर में जितनी भीड पुरूषों की है लगभग उतनी ही महिलाओं की भी है और वे विद्या के काम को सराह रही हैं… सिल्क स्मिता की कहानी से सहानुभूति प्रकट कर रही हैं। यही नहीं, इस फिल्म की रिलीज के बाद कई निर्माता महिला प्रधान फिल्मों में पैसा लगाने को तैयार हो रहे हैं। इस फिल्म ने यह धारणा तोड डाली है कि महिला प्रधान फिल्म में पैसा लगाना मतलब पैसा डुबाना है। गत वर्ष जब एकता कपूर ने अपनी पिछली फिल्म वन्स अपॉन ए टाइम इन मुम्बई की सफलता के बाद निर्देशक मिलन लूथरिया के साथ विद्या बालन को लेकर “द डर्टी पिक्चर” का निर्माण शुरू किया था तो बॉलीवुड में कहा जा रहा था कि एकता कपूर पागल हो गई है जो विद्या बालन को लेकर फिल्म बना रही है क्योंकि जिस तरह से एकता कपूर ने इस फिल्म का प्रचार शुरू किया था उससे साफ झलक रहा था कि वे एक ऎसी फिल्म बनाने जा रही हैं जो विषय के साथ-साथ दृश्यों के लिहाज से भी जबरदस्त हॉट होगी।

भरपूर प्रचार प्रसार के कारण डर्टी पिक्चर ने दर्शकों में देखने के प्रति एक ऎसी चाह पैदा की जिसने डर्टी पिक्चर को 100 करोड की कमाई के उस वर्ग में शामिल करवा दिया जहां सिर्फ सलमान खान, शाहरूख खान और अजय देवगन पहुंचे थे। वैसे शामिल तो इसमें करीना कपूर भी थी लेकिन वे सिर्फ शो पीस थी जबकि विद्या बालन पूरी तरह से नायक के रूप में उपस्थित हैं। “द डर्टी पिक्चर” की सफलता के बाद बॉलीवुड में फिर से नायिका प्रधान फिल्मों का चलन जोर पकडने लगा है। आज कई निर्माता निर्देशक ऎसी फिल्में बना रहे हैं जिनमें नायिका मुख्य किरदार के रूप में नजर आ रही है। विद्या बालन जब फिल्म “पा” में अमिताभ की मां का किरदार कर रही थीं तब डर रही थीं कि कहीं उन पर बडी उम्र की औरत का ठप्पा न लग जाए। तब इस फिल्म के निर्देशक बाल्की ने उनसे कहा था कि तुम पैदायशी औरत हो, इस औरतपन का जश्न मनाओ। इससे भागो मत, इसे कबूल करो और इससे खुश हो जाओ। विद्या ने यही किया और परिणाम सामने है। “द डर्टी पिक्चर” सुपर हिट है। आमिर खान की थ्री इडियट के “द डर्टी पिक्चर” ऎसी फिल्म है जो बॉक्स ऑफिस पर सफलता पूर्वक 50 दिन पूरे कर चुकी है और आगे भी उम्मीद की जा रही है कि यह फिल्म सिनेमा हालों में दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल होगी। कहा तो यह भी जा रहा है कि यह फिल्म तीन वर्ष बाद पहली ऎसी फिल्म होगी जो बॉक्स ऑफिस पर 100 दिन पूरे करेगी। अपनी सफलता के बाद विद्या ने ये मानना छोड दिया है कि वे कभी लडकी का रोल करेंगी। उनकी आने वाली फिल्म “कहानी” में वे एक गर्भवती महिला हैं और बेझिझक हर कहीं गर्भवती महिला का गेटअप धारे जा रही हैं। फिल्म को कामयाब कराना भी एक नशा होता है। विद्या फिलहाल इस नशे में चूर हैं।

बॉलीवुड में विद्या बालन को “द डर्टी पिक्चर” की सफलता के बाद विद्या खान के नाम से पुकारा जा रहा है जबकि वे कहती हैं अब बॉलीवुड के खानों को अपने नाम के आगे बालन लगा लेना चाहिए। यह एक औरत का उन मर्दो को खुली चुनौती हैं जिन्होंने यह प्रचारित कर रखा है कि भारतीय सिनेमा का हिन्दी फिल्म उद्योग सिर्फ उनके बलबूते पर चल रहा है, फल-फूल रहा है, लेकिन वास्तव में ऎसा नहीं है। अपनी फिल्म के प्रचार के वक्त विद्या बालन ने आमिर खान की तरह इस बात की फिक्र नहीं की कि उन्हें क्या करना है। उन्होंने हर वो काम किया जो सिर्फ आमिर खान करते हैं। इस फिल्म के प्रमोशन के दौरान विद्या बालन ने लगातार दो महीने तक सिर्फ लाल रंग की ही साडी पहनी न सिर्फ उन्होंने उसे पहना बल्कि इस रंग को भी उन्होंने महिलाओं में इस कदर लोकप्रिय किया कि आज हर दूसरी औरत लाल रंग की साडी पहने दिख जाती है। अब वे गर्भवती बनकर घूम रही हैं। वे उस सम्मान को खोना नहीं चाहतीं, जो “द डर्टी पिक्चर” की कामयाबी के कारण उनके हिस्से में आ रहा है। फिल्म दर फिल्म वे उसे दोहराना चाहती हैं। उनका ये जिम्मेदारी भरा कदम भी उन्हें एक लडकी नहीं, परिपक्व औरत ही बनाता है। पहली ही फिल्म से विद्या साडी में दिखाई दे रही हैं। अब तो किसी और पोशाक में विद्या की कल्पना भी नहीं करते बनती। वाकई वे अपने औरतपन को जी रही हैं और उसका जश्न मना रही हैं। -राजेश कुमार भगताणी
विद्या ने परदे पर लौटाया “औरत” को
जनवरी 23, 2012 khaskhabar द्वारा