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bollywood model sexy lesbian photoshoot

आपने मॉडल्स को अलग-अलग तरह के फोटोशूट में देखा होगा। लेकिन क्या आपने बॉलिवुड की महिला मॉडल्स को लेस्बियन फोटोशूट में देखा है। आइए हम आपको लेस्बियन फोटोशूट की कुछ झलकियां दिखाएं, जिन्हें देखकर आप अपने दिल थाम लेंगे।

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बॉलिवुड की मॉडल और आइटम गर्ल यासमीन खान और सुपर हॉट रैंप मॉडल नताशा ने एक लेस्बियन फोटोशूट करवाया।

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यासमीन और नताशा ने यह फोटोशूट मुंबई के गोरेगांव स्थित एक स्टूडियों में करवाया। इस फोटोशूट की थीम थी लेस्बियन।

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फोटोशूट के दौरान दोनों मॉडल्स ने काफी सेक्सी ड्रेस पहन रखी थी। दोनों ने लिप लॉक करते हुए फोटोशूट करवाया।

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फोटोशूट के समय दोनों मॉडल्स ऎ दूसरे में ऎसी खोई हुई थी जैसे उन्हें दुनिया की कोई खबर ही ना हो। दोनों मॉडल्स बस एक दूसरे को प्यार करने में मस्त थी।

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एक दूसरे के बॉडीपार्ट्स को प्यार करते हुए ये दोनों मॉडल्स इतनी हॉट और सेक्सी लग रही है कि किसी का भी दिल फिसल जाए।

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एकता कपूर की फिल्म “द डर्टी पिक्चर” ने बॉक्स ऑफिस पर जिस तरह से एकछत्र राज्य किया उसने बॉलीवुड के बरसों के इस मिथक को तोडने में कामयाबी पायी कि महिला किरदार या नायिका प्रधान फिल्मों को सफलता नहीं मिलती है। ऎसा नहीं है कि बॉलीवुड में पहले नायिका प्रधान फिल्में नहीं बनीं या वे चली नहीं लेकिन उन फिल्मों का अनुपात पुरूषा प्रधान या नायक प्रधान फिल्मों में नगण्य सा रहा है। पूर्ण रूप से नायिका प्रधान फिल्मों को याद करते हुए दिमाग पर जब जोर डालते हैं तो हमें राजकुमार संतोषी की फिल्म “दामिनी” का ध्यान आता है। यह नायिका प्रधान फिल्म थी जबकि इसमें नायक (ऋषि कपूर) और सशक्त सहनायक (सनी देओल) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करायी थी लेकिन आज तक यह फिल्म याद आते ही दिमाग में मीनाक्षी शेषाद्रि का चेहरा सामने आ जाता है। वैसे राजकुमार संतोषी ने इससे पहले महिलाओं की दुर्दशा पर ही बडी-बडी नायिकाओं को लेकर “लज्जा” नामक फिल्म बनाई लेकिन उसे दर्शकों ने ठुकरा दिया था।

रानी मुखर्जी की “लागा चुनरी में दाग” को भी दर्शकों ने नापसंद कर दिया था। खैर…दर्शकों की पसंद का ऊंट किस करवट बैठेगा ये कहना वाकई मुश्किल काम है। असल मुद्दा ये है कि आजकल महिला प्रधान मुद्दों और महिला पात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका वाली फिल्में बडे पैमाने पर व्यावसायिक सिनेमा का हिस्सा बन रह रही हैं और दर्शक इन्हें पसंद भी कर रहे हैं। यहां तक कि “द डर्टी पिक्चर” जैसी बोल्ड फिल्मों तक को युवतियों तथा महिलाओं का खुलेआम समर्थन प्राप्त हो रहा है, जबकि ऎसी किसी भी फिल्म को आज से कुछ साल पहले तक देखने का अधिकार केवल पुरूषों के पास था। आज थियेटर में जितनी भीड पुरूषों की है लगभग उतनी ही महिलाओं की भी है और वे विद्या के काम को सराह रही हैं… सिल्क स्मिता की कहानी से सहानुभूति प्रकट कर रही हैं। यही नहीं, इस फिल्म की रिलीज के बाद कई निर्माता महिला प्रधान फिल्मों में पैसा लगाने को तैयार हो रहे हैं। इस फिल्म ने यह धारणा तोड डाली है कि महिला प्रधान फिल्म में पैसा लगाना मतलब पैसा डुबाना है। गत वर्ष जब एकता कपूर ने अपनी पिछली फिल्म वन्स अपॉन ए टाइम इन मुम्बई की सफलता के बाद निर्देशक मिलन लूथरिया के साथ विद्या बालन को लेकर “द डर्टी पिक्चर” का निर्माण शुरू किया था तो बॉलीवुड में कहा जा रहा था कि एकता कपूर पागल हो गई है जो विद्या बालन को लेकर फिल्म बना रही है क्योंकि जिस तरह से एकता कपूर ने इस फिल्म का प्रचार शुरू किया था उससे साफ झलक रहा था कि वे एक ऎसी फिल्म बनाने जा रही हैं जो विषय के साथ-साथ दृश्यों के लिहाज से भी जबरदस्त हॉट होगी।

भरपूर प्रचार प्रसार के कारण डर्टी पिक्चर ने दर्शकों में देखने के प्रति एक ऎसी चाह पैदा की जिसने डर्टी पिक्चर को 100 करोड की कमाई के उस वर्ग में शामिल करवा दिया जहां सिर्फ सलमान खान, शाहरूख खान और अजय देवगन पहुंचे थे। वैसे शामिल तो इसमें करीना कपूर भी थी लेकिन वे सिर्फ शो पीस थी जबकि विद्या बालन पूरी तरह से नायक के रूप में उपस्थित हैं। “द डर्टी पिक्चर” की सफलता के बाद बॉलीवुड में फिर से नायिका प्रधान फिल्मों का चलन जोर पकडने लगा है। आज कई निर्माता निर्देशक ऎसी फिल्में बना रहे हैं जिनमें नायिका मुख्य किरदार के रूप में नजर आ रही है। विद्या बालन जब फिल्म “पा” में अमिताभ की मां का किरदार कर रही थीं तब डर रही थीं कि कहीं उन पर बडी उम्र की औरत का ठप्पा न लग जाए। तब इस फिल्म के निर्देशक बाल्की ने उनसे कहा था कि तुम पैदायशी औरत हो, इस औरतपन का जश्न मनाओ। इससे भागो मत, इसे कबूल करो और इससे खुश हो जाओ। विद्या ने यही किया और परिणाम सामने है। “द डर्टी पिक्चर” सुपर हिट है। आमिर खान की थ्री इडियट के “द डर्टी पिक्चर” ऎसी फिल्म है जो बॉक्स ऑफिस पर सफलता पूर्वक 50 दिन पूरे कर चुकी है और आगे भी उम्मीद की जा रही है कि यह फिल्म सिनेमा हालों में दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल होगी। कहा तो यह भी जा रहा है कि यह फिल्म तीन वर्ष बाद पहली ऎसी फिल्म होगी जो बॉक्स ऑफिस पर 100 दिन पूरे करेगी। अपनी सफलता के बाद विद्या ने ये मानना छोड दिया है कि वे कभी लडकी का रोल करेंगी। उनकी आने वाली फिल्म “कहानी” में वे एक गर्भवती महिला हैं और बेझिझक हर कहीं गर्भवती महिला का गेटअप धारे जा रही हैं। फिल्म को कामयाब कराना भी एक नशा होता है। विद्या फिलहाल इस नशे में चूर हैं।

बॉलीवुड में विद्या बालन को “द डर्टी पिक्चर” की सफलता के बाद विद्या खान के नाम से पुकारा जा रहा है जबकि वे कहती हैं अब बॉलीवुड के खानों को अपने नाम के आगे बालन लगा लेना चाहिए। यह एक औरत का उन मर्दो को खुली चुनौती हैं जिन्होंने यह प्रचारित कर रखा है कि भारतीय सिनेमा का हिन्दी फिल्म उद्योग सिर्फ उनके बलबूते पर चल रहा है, फल-फूल रहा है, लेकिन वास्तव में ऎसा नहीं है। अपनी फिल्म के प्रचार के वक्त विद्या बालन ने आमिर खान की तरह इस बात की फिक्र नहीं की कि उन्हें क्या करना है। उन्होंने हर वो काम किया जो सिर्फ आमिर खान करते हैं। इस फिल्म के प्रमोशन के दौरान विद्या बालन ने लगातार दो महीने तक सिर्फ लाल रंग की ही साडी पहनी न सिर्फ उन्होंने उसे पहना बल्कि इस रंग को भी उन्होंने महिलाओं में इस कदर लोकप्रिय किया कि आज हर दूसरी औरत लाल रंग की साडी पहने दिख जाती है। अब वे गर्भवती बनकर घूम रही हैं। वे उस सम्मान को खोना नहीं चाहतीं, जो “द डर्टी पिक्चर” की कामयाबी के कारण उनके हिस्से में आ रहा है। फिल्म दर फिल्म वे उसे दोहराना चाहती हैं। उनका ये जिम्मेदारी भरा कदम भी उन्हें एक लडकी नहीं, परिपक्व औरत ही बनाता है। पहली ही फिल्म से विद्या साडी में दिखाई दे रही हैं। अब तो किसी और पोशाक में विद्या की कल्पना भी नहीं करते बनती। वाकई वे अपने औरतपन को जी रही हैं और उसका जश्न मना रही हैं। -राजेश कुमार भगताणी

hot sunny leone

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hot sunny leone

साल 2011 फिल्म इंडस्ट्री के लिए खास रहा। भले ही हर बार की तरह फिल्मों से जुडी गॉसिप ने खबरों में जगह बनाई, लेकिन विवादित सितारों ने खास सुर्खियां बटोरीं। चर्चा कुछ ऎसी खबरों की जिन्होंने विवाद का रूप लिया और इन खबरों के जरिए सितारों ने खास सुर्खियाँ बटोरने में सफलता पाई। वर्ष 2011 के जाते-जाते बॉलीवुड में सर्वाधिक चर्चा पाने में सफल रही पाकिस्तान मूल की अभिनेत्री वीणा मलिक। वीणा का एफएचएम पत्रिका का न्यूड फोटो शूट काफी चर्चा में रहा।
हालांकि वीणा ने इसे खारिज ही किया और पत्रिका के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की बात भी कही। अभी वीणा के इस फोटो को लेकर शुरू हुआ हंगामा थमा भी नहीं था कि उनके अचानक लापता हो जाने की खबरों ने जबरदस्त सुर्खियां बटोरी। हालांकि दो दिन बाद इस बात का भी पता चल गया कि वीणा कहीं नहीं गई थी बल्कि वो अपने असली नाम जाहिदा के नाम से मुम्बई के जुहू स्थित ओकलैण्ड होटल में आराम फरमा रही थीं। इस साल की यदि सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली अदाकाराओं की सूची तैयार की जाए, तो सबसे पहला नाम आता है विद्या बालन का। इस साल “द डर्टी पिक्चर्स” में दक्षिण सिनेमा की सेक्सी और बोल्ड अदाकारा सिल्क स्मिता का किरदार निभाने के कारण विद्या खबरों के केन्द्र में रहीं। इस फिल्म के प्रदर्शन से एक सप्ताह पूर्व सिल्क स्मिता के भाई ने अदालत में एक वाद दायर करके इस फिल्म के साथ विद्या बालन को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया। अदालत ने इस याचिका को खारिज किया लेकिन हैदराबाद की एक अदालत ने इस फिल्म की अभिनेत्री विद्या बालन के खिलाफ मुकदमा दायर करने की याचिका को स्वीकार कर लिया। इस याचिका में विद्या बालन पर अश्लीलता परोसने का आरोप लगाया गया है। निर्देशक मधुर भंडारकर की ड्रीम प्रोजेक्ट फिल्म “हीरोइन” भले ही अब तक बनी भी न हो लेकिन इससे जुडे विवादों ने साल 2011 में काफी समाचारों की सुर्खियां हासिल कीं। दरअसल पहले फिल्म की नायिका बच्चन बहू ऎश्वर्य थीं जिनके साथ निर्देशक ने कान फिल्म समारोह में न सिर्फ शिरकत की बल्कि उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय मंच से ऎश्वर्या राय बच्चन के साथ इस फिल्म को बनाने की घोषणा की। इसके बाद उन्होंने ऎश्वर्या राय बच्चन के साथ इस फिल्म की आठ दिन की शूटिंग पूरी की। लेकिन अचानक ऎश्वर्या राय बच्चन के ससुर अमिताभ बच्चन की इस घोषणा ने की ऎश्वर्या राय माँ बनने वाली हैं, इस फिल्म को खटाई में डाल दिया। दो-तीन माह तक लगातार चर्चाओं में रहने वाली इस फिल्म को मधुर भंडारकर ने बॉलीवुड की छम्मक छल्लो करीना कपूर के साथ बनाने का ऎलान किया। इस फिल्म को स्वीकार करने से पूर्व करीना कपूर ने कई शर्ते रखीं जिनमें मुख्य शर्त थी मेहनताने और नायक को बदलने की। इन दोनों शर्तो को इस फिल्म की निर्माण कम्पनी यूटीवी ने स्वीकार किया। पहले नायक बदला गया और उसके बाद करीना कपूर को इस फिल्म के लिए आठ करोड रूपये का मेहनताना देना तय हुआ। बॉलीवुड में किसी नायिका को मिलने वाला यह सर्वाधिक पारिश्रमिक रहा। इससे पहले किसी नायिका को इतना पैसा नहीं मिला। मधुर भंडारकर ने इस फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी है और इन दिनों इस फिल्म की शूटिंग तेजी से चल रही है। जब से विद्या बालन की डर्टी पिक्चर ने प्रदर्शन के बाद बॉलीवुड को हिलाया है तभी से हीरोइन की नायिका करीना कपूर की नींद उड गई है। उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि दर्शक अब उनकी फिल्म की तुलना विद्या बालन की फिल्म और अभिनय से करेंगे। अगर वे थोडा भी दर्शकों को प्रभावित करने में असफल रहीं तो उनका करियर दांव पर लग जाएगा और करीना ऎसा कभी नहीं होने देना चाहती हैं। इसलिए उन्होंने इस फिल्म के निर्देशक मधुर भंडारकर से कहा है कि उन्हें अपने निर्देशन में उनकी अभिनय प्रतिभा का पूरी तरह से दोहन करना होगा। अब यह तो वक्त ही बताएगा कि करीना इस फिल्म के जरिए कहां तक विद्या बालन को मात देने में सफल होती हैं। एक तरफ करीना जहां हीरोइन के लिए चर्चित रहीं वहीं वह बॉलीवुड के दो दिग्गज खानों सलमान खान और शाहरूख खान के साथ बॉडीगार्ड और रॉ-वन में आकर भी चर्चा में रही। इन दोनों फिल्मों ने 100 करोड के व्यावसायिक आंकडे को छुआ। हालांकि इन फिल्मों में करीना कपूर के लिए कुछ विशेष नहीं था। बॉडीगार्ड में वह मात्र शो पीस थी और रॉ-वन में उन पर फिल्माया गया गीत छम्मक छल्लो उनसे ज्यादा चर्चा पाने में सफल हुआ। वर्ष 2011 में बॉलीवुड के बादशाह खान भी जबरदस्त चर्चा में रहे। पहले अपनी फिल्म रॉ-वन को लेकर, उसके बाद प्रियंका चोपडा के साथ अपनी बढती नजदीकियों के कारण और वर्ष के अन्तिम सप्ताह में अपनी फिल्म डॉन-2 के प्रदर्शन को लेकर वे पूरे वर्ष विवादों में रहे। शाहरूख खान ने अपनी फिल्म रॉ-वन के बारे में बडे-बडे दावे किए लेकिन बॉक्स ऑफिस पर मिली असफलता ने उनके ख्वाबों को तोडकर चकनाचूर कर दिया। पौने दो सौ करोड की लागत से बनी उनकी रॉ-वन ने दीपावली पर प्रदर्शित होकर अपनी लागत वसूलने में तो कामयाबी प्राप्त की लेकिन मुनाफा कमाने में यह फिल्म पूरी तरह से नाकाम रही। वर्ष 2011 में बॉलीवुड में शाहरूख खान से ज्यादा चर्चा पाने में अव्वल रहे बॉलीवुड के दबंग खान उर्फ सलमान खान। इस वर्ष सलमान खान की दो फिल्में प्रदर्शित हुई। वर्ष के मध्य माह जून की 3 तारीख को उनकी फिल्म रेडी ने सिनेमाघरों में दस्तक दी। 2010 की ईद पर प्रदर्शित हुई दबंग के बाद सलमान खान की यह पहली फिल्म थी। 40 करोड की सामान्य लागत में बनी इस फिल्म ने 179 करोड का व्यवसाय करके सलमान खान की सफलता को न सिर्फ आगे बढाया बल्कि यह सिद्ध किया कि दर्शकों को अस्सी के दशक का नायक फिर लुभाने लगा है। इस फिल्म की सफलता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि उनकी फिल्म बॉडीगार्ड को देखने के लिए दर्शक उतावले होने लगे। ईद के मौके पर जब बॉडीगार्ड ने सिनेमाई परदे पर दस्तक दी तो किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि यह फिल्म सप्ताह में 100 करोड के कारोबार को छुएगी लेकिन ऎसा हुआ और बॉलीवुड के लिए सलमान खान एक चमत्कार बन गए। बॉडीगार्ड की कथा पटकथा, संवाद, निर्देशन अभिनय सभी कुछ बेकार था, अगर था तो सिर्फ सलमान खान का नाम। इस फिल्म की जबरदस्त सफलता ने बॉलीवुड में एक मिथक स्थापित करने में सफलता प्राप्त की। वर्तमान समय में कहानी से ज्यादा महžव स्टार का है अगर आपकी फिल्म में कोई बडा और स्थापित कलाकार जैसे सलमान, शाहरूख, आमिर या छोटे कलाकारों के साथ कोई बडा निर्देशक करण जौहर, मधुर भंडारकर, प्रकाश झा, यश चोपडा है तो सफलता निश्चित ही आपके कदम चूमने को तैयार है। इस वर्ष बॉलीवुड के शहंशाह माने जाने वाले अमिताभ बच्चन एक तरफ जहां अपनी फिल्म आरक्षण पर पूरे देश में उभरे विवाद के कारण चर्चा में रहे वहीं टीवी चैनल पर प्रसारित रियलिटी गेम शो कौन बनेगा करोडपति के प्रस्तुतकर्ता के तौर पर उन्होंने पूरे देश में वाहवाही बटोरी। इस शो को देखने वालों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ। इसके अतिरिक्त अमिताभ बच्चन ने सर्वाधिक चर्चा स्वयं के दादा होने पर पाई। 16 नवम्बर को उनकी बहू ऎश्वर्या राय ने एक बेटी को जन्म दिया। लगभग डेढ महीना होने का आया है लेकिन बच्चन परिवार अभी तक इस बच्ची का नामकरण नहीं कर पाया है। इस वर्ष आमिर खान अभिनीत कोई फिल्म प्रदर्शित नहीं हुई। आमिर खान के बैनर तले बनी फिल्म “देहली बेली” ने प्रदर्शन के पहले ही एक गाने के कारण विवादों में आ गई थी। फिल्म के “डीके बोस” में इस्तेमाल की गई गाली ने काफी सुर्खियां अपने नाम की। इतना ही नहीं फिल्म को सेंसर बोर्ड ने छोटे पर्दे पर भी दिखाने की अनुमति नहीं दी है। वर्ष के अन्तिम माह के प्रथम दिन आमिर खान एक पुत्र के पिता बने। उनकी पत्नी किरण राव सेरेगोट मदर के जरिए माँ बनीं। एक सप्ताह अपने पुत्र के कारण चर्चा में रहने वाले आमिर खान अगले सप्ताह अपने बेटे के नामकरण के कारण सुर्खियाँ बटोरने में सफल हुए। उन्होंने अपने पुत्र का नाम अपने पडदादा के ऊपर रखा। एशिया के सबसे सेक्सी पुरूष का खिताब जीतने वाले ऋतिक रोशन इस बार जहां इस खिताब की वजह से चर्चाओं में रहे वहीं वे अपनी फिल्म जिन्दगी ना मिलेगी दोबारा के कारण भी सुर्खियाँ बटोरने में कामयाब हुए। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरूआत करते हुए जो सफलता प्राप्त की वह बॉलीवुड के लिए एक मिसाल बनी।
आजकल जहां फिल्मकार अपनी फिल्मों के प्रदर्शन से पूर्व प्रचार के जरिए उसके लिए जो हाइप पैदा करते हैं वह ऋतिक की जिन्दगी मिलेगी ना दोबारा में पूरी तरह से गायब थी। जिन दर्शकों ने इस फिल्म को देखा उन्होंने इसे सराहा और यही माउथ पब्लिसिटी इस फिल्म की कामयाबी का मूल मंत्र बना। जोया अख्तर ने इस फिल्म के जरिए अपनी निर्देशकीय क्षमता को साबित करने में कामयाबी पाई वहीं फरहान अख्तर ने 2008 में आई रॉक आन के बाद अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाने में कामयाबी पाई। ऋतिक रोशन आगामी वर्ष प्रदर्शित होने वाली अपनी फिल्म अग्निपथ के कारण भी बेहद चर्चा में रहे। 90 के दशक में बनाई गई अपने पिता यश जौहर की इस क्लासिक कॉमर्शियल फिल्म को करण जौहर ने रीमेक के तौर पर ऋतिक रोशन के साथ संजय दत्त को लेकर नए सिरे से बनाया है। मूल फिल्म के कथानक में हालांकि उन्होंने कुछ फेरबदल किया है लेकिन 90 प्रतिशत कथानक वही रखा है। इस फिल्म में जहां ऋतिक रोशन की तुलना अमिताभ बच्चन द्वारा अभिनीत लार्जन दैन लाइफ किरदार विजय दीनानाथ चौहान से की जा रही है, अपने करियर में पहली बार ऋषि कपूर खलनायक के रूप में नजर आने वाले हैं।
अग्निपथ के जारी प्रोमोज को देखने के बाद निश्चित तौर पर यह कहा जा सकता है कि ऋतिक रोशन के चेहरे पर वो भाव ही नहीं आ रहे हैं जो अमिताभ बच्चन ने उस वक्त अपने चेहरे पर दिए थे। इस फिल्म के अतिरिक्त ऋतिक रोशन पहली बार इस वर्ष टीवी पर नजर आने के कारण भी चर्चा में रहे। इस वर्ष वे जस्ट डांस के निर्णायक की भूमिका में दर्शकों को प्रभावित करने में सफल रहे। इस साल कलाकार फिल्मों के अलावा भी चर्चा में रहे हैं। आयकर विभाग ने दो अभिनेत्रियों कैटरीना कैफ और प्रियंका चोपडा के घर छापे मारे और अदाकाराएं बन गई सुर्खियों की मçल्लकाएं। इस साल अश्लील और उत्तेजक दृश्यों से भरी फिल्मों की कोई कमी नहीं रहीं। भले इस साल प्रदर्शित हुई फिल्म “रागिनी एमएमएस” के कलाकार चर्चा में नहीं आए हो लेकिन फिल्म का मुख्य किरदार “रागिनी” जरूर खबरों में छाया रहा है। यह फिल्म दिल्ली की एक लडकी “दीपिका” पर प्रेरित थी। वास्तविक रागिनी यानी दीपिका ने फिल्मकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की बात तक कही थी।
बॉलीवुड और राजनीति एक दूसरे के पूरक कहे जा सकते हैं। तभी तो कभी समाजवादी पार्टी के नेता रहे अमर सिंह की टेप में एक महिला की आवाज इस साल विवादों में आ गई, जिसे लेकर कहा जा रहा था कि यह आवाज बिपाशा बसु की है। हालांकि बिपाशा ने इसे महज अफवाह बताया है। बॉलीवुड की खबरों में विवादों के कारण हमेशा सुर्खियों में रहने वाले फिल्मकार रामगोपाल वर्मा इस साल भी सुर्खियों में छाए रहे। इस साल रामू अपनी फिल्म “नॉट ए लव स्टोरी” के कारण चर्चा में बने रहे हैं। दरअसल यह फिल्म साल 2008 के नीरज ग्रोवर हत्याकांड से प्रेरित बताई जा रही थी। यही नहीं, फिल्म की पहली झलक भी वर्मा ने नीरज केस की सुनवाई के दिन ही जारी की। गंभीर मुद्दों को फिल्म की विषय-वस्तु बनाने में माहिर फिल्मकार प्रकाश झा की इस साल आई अमिताभ बच्चन, सैफ अली खान, मनोज वाजपेयी, प्रतीक बब्बर और दीपिका पादुकोण अभिनीत फिल्म “आरक्षण” ने गहरा विवाद खडा किया। जगह-जगह फिल्मकार, कलाकारों और फिल्म के पोस्टर जलाए गए।
जर्मनी के पूर्व तानाशाह एडॉल्फ हिटलर पर बनी फिल्म “गांधी टू हिटलर” ने भी विवादों को जन्म दिया। फिल्म के नाम से लेकर कलाकार तक बदले गए हैं। फिल्म का नाम “डियर फ्रैंड हिटलर” से “गांधी टू हिटलर” किया गया और विवादों को देखते हुए अभिनेता अनुपम खेर ने फिल्म छो़ड दी। “गांधी टू हिटलर” में रघुवीर यादव और नेहा धूपिया ने मुख्य भूमिका निभाई।

बॉलीवुड के सर्वाधिक महंगे निर्देशकों की श्रेणी में शामिल हुए नौजवान रोहित शेट्टी इन दिनों यूटीवी बिंदास के रियलिटी शो बिग स्विच-3 को प्रस्तुत कर रहे हैं। इस शो को उन्होंने इसलिए करना स्वीकार किया क्योंकि अपनी अगली फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस शुरू करने से पहले और बोल बच्चन पूरी करने के बाद उनके पास कुछ वक्त खाली था जिसका उन्होंने सदपुयोग करना बेहतर समझा। हालांकि उनके इस शो को सीमित दर्शक वर्ग मिला है। बॉलीवुड में सात फिल्मों का निर्देशन करके लगातार सफलता प्राप्त करने वाले वे एक मात्र निर्देशक हो गए हैं। वरना एक समय पर एन.चन्द्रा ऎसे निर्देशक थे जिन्होंने लगातार तीन सुपर हिट फिल्में अंकुश, प्रतिघात और तेजाब थी, जबकि रोहित शेट्टी ने जमीन की असफलता के बाद अजय देवगन के साथ गोलमाल, गोलमाल रिटर्न, आल द बेस्ट, गोलमाल-3 और सिंघम जैसी लगातार सफल फिल्मों को देकर अपनी असफल फिल्म जमीन को लगभग भुला दिया है। उनकी अजय देवगन के साथ वाली सातवीं फिल्म बोल बच्चन हाल ही में पूरी हुई है और यह इस वर्ष के मध्य तक प्रदर्शित होने की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने अपनी सातवीं फिल्म में एक बार फिर से अजय देवगन के साथ अभिषेक बच्चन को लिया जो उनकी पहली निर्देशित फिल्म जमीन के दूसरे नायक थे। उन्होने अपनी इस फिल्म में एक्शन के साथ कॉमेडी का भी बराबर का डोज रखा है।
एक्शन… रोमांस… कॉमेडी… गाने… यानी वो पूरे मसाले जो किसी फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर हिट कराने के लिए जरूरी होते हैं, उन सबका इस्तेमाल रोहित अपनी फिल्मों में करते हैं। उडती हुई कारों के दृश्य तो मानो रोहित शेट्टी की फिल्मों की पहचान ही बन गए हैं। उनके साथ काम करने वालों को यह अच्छी तरह याद हो गया है कि कारों के दृश्य किस तरह फिल्माने हैं। रोहित अपनी फिल्मों की प्रेरणा 60-70 के दशक में बनी बॉलीवुड फिल्मों से ही लेते हैं। वे खुद यह बात स्वीकार करते हैं कि उस दौर की फिल्मों को मैं नए प्रेजेन्टेशन के साथ बना रहा हंँू और यही आज की जनरेशन की पसंद है। हालांकि उनकी फिल्में माइंडलेस सिनेमा की श्रेणी में आती हैं, अर्थात् फिल्म देखते वक्त आपको दिमाग लगाने की आवश्यकता नहीं है, इसके बावजूद यह फिल्में न सिर्फ सफल हो रही हैं बल्कि आय के वो रिकॉर्ड बना रही हैं लेकिन बारे में कभी बॉलीवुड कल्पना भी कर पाता था। अपनी इस सफलता पर रोहित शेट्टी को गर्व महसूस होता है।
गोलमाल रिटर्न के जरिए जो सफलता रोहित को मिली उसने उन्हें स्पष्ट रूप से इस बात का संकेत दिया कि अगर अब उन्हें सफलता हासिल करनी है तो उन्हें हास्य को कुछ समय के लिए अपनी फिल्मों से दूर रखना होगा और अपने इसी सिक्स सेंस को भांपकर रोहित एक बार फिर एक्शन के मैदान में आए। इसके लिए उन्होंने दक्षिण भारत की फिल्म सिंघम को चुना जो वहाँ पर जबरदस्त सफलता प्राप्त कर रही थी और बॉलीवुड में भी सलमान खान दक्षिण के जादू को सफलतापूर्वक भुना रहे थे। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए रोहित शेट्टी ने एक बार फिर से अजय देवगन से बात की और अजय देवगन ने भी रोहित शेट्टी के साथ मिलकर अपनी पुरानी छवि में लौटने में ही बेहतरी समझी। रोहित उन्हें भी इस बात को समझाने में कामयाब हो गए कि दर्शक अब उन्हें हास्य सितारे के रूप में देखकर उकता चुका है। स्वयं अजय को भी अपना करियर डोलता नजर आने लगा था, शायद इसीलिए उन्होंने सिंघम में काम करना स्वीकार किया। सिंघम जैसी एक्शन फिल्म बनाना उनके दर्शकों के लिए चौंकाने वाली बात थी। सिंघम ने प्रदर्शन के साथ ही एकल नायक की सफल वापसी को सही साबित करते हुए सौ करोड से ऊपर का व्यवसाय करके बॉलीवुड में एक बार फिर से एक्शन दृश्यों और नायकों की वापसी को सशक्तता प्रदान की। उन्होंने सलमान खान द्वारा वांटेड, दबंग, रेडी और बॉडीगार्ड की सफलता का क्रम जारी रखा।

अपनी फिल्म सिंघम के बारे में रोहित कहते हैं कि मैंने कई रातें इस फिल्म के बारे में सोचते-सोचते काटी कि किस तरह से मुझे इस फिल्म को दर्शकों की नजरों में सफलता के साथ उतारना है। मैंने इस फिल्म के लिए काफी मेहनत की। दरअसल मैं यह साबित करना चाहता था कि मैं सिर्फ भाग्य के भरोसे या अजय देवगन के भरोसे ही नहीं चल रहा। बॉलीवुड में मेरी लगातार सफलता को दीपावली के साथ भी जोडा गया। मैं इस मिथक को तोडना चाहता था और मैंने सिंघम को वर्ष के मध्य में प्रदर्शित किया तब न तो कोई ईद थी न दीपावली न ही कहीं क्रिसमिस का माहौल था। सिंघम न सिर्फ सफल हुई बल्कि उसने 100 करोड से ज्यादा का व्यवसाय करके मेरी निर्देशकीय क्षमता को सही दिशा प्रदान की।
रोहित शेट्टी का नाता फिल्मों में उनके जन्म से पहले का ही है। उनके पिता अपने समय के सुप्रसिद्ध खलनायक और फाइट कम्पोजर हुआ करते थे। आज के युवा दर्शकों के साथ ही पुरानी पीढी के दर्शकों को भी फिल्मों में एक गंजा गोल चेहरे वाला खूंखार खलनायक याद होगा जो हमेशा नायक को अपनी आंखों से बरसती आग के जरिए ही ठंडा कर दिया करता था। याद दिलाना चाहेेगे अमिताभ बच्चन की डॉन जिसमें रोहित के पिता एम.बी.शेट्टी ने जबरदस्त काम किया था। रोहित के पिता दर्शकों की नजरों में शेट्टी के नाम से ही प्रसिद्ध थे। एक वक्त था जब उनके पिता प्रदर्शित होने वाली हर दूसरी फिल्म में नायक के साथ मारपीट करते हुए नजर आते थे। अमिताभ बच्चन के साथ उनका फिल्म त्रिशूल वाला एक्शन दृश्यों दर्शकों के जेहन में आज भी ताजा है।
ऎसा नहीं है कि रोहित हमेशा अजय के साथ ही फिल्में बनाते रहेंगे। “बोल बच्चन” के बाद रोहित, अजय का साथ छोडने जा रहे हैं और वे अपनी अगली फिल्म बॉलीवुड के बादशाह खान शाहरूख के साथ बनाने जा रहे हैं। इस प्रक्रिया के बारे में वे कहते हैं कि यह एक स्वाभाविक बात है। जरूरी नहीं कि मेरी हर फिल्म में अजय देवगन ही नजर आए। ऎसा भी नहीं है कि मैं अजय देवगन के साथ आगे काम नहीं करूंगा। चेन्नई एक्सप्रेस के बाद मैं जिस पटकथा पर काम कर रहा हूं उसमें निश्चित तौर अजय देवगन ही नजर आएंगे। शाहरूख के साथ फिल्म की बात पर वे कहते हैं कि गोलमाल 3 के रिलीज होने के बाद शाहरूख ने खुद मुझे कॉल किया और मुलाकात के बाद हमने साथ काम करना तय किया। अब हम चेन्नई एक्सप्रेस नामक फिल्म में एक साथ काम करने जा रहे हैं। इस फिल्म की शूटिंग आगामी मार्च माह में शुरू होगी और सम्भवत: यह फिल्म इस वर्ष के अन्त में सिनेमा घरों में प्रदर्शित होगी। इस फिल्म में शाहरूख खान एक्शन के साथ रोमांटिक भूमिका भी अभिनीत करते नजर आएंगे। रोहित को पूरी उम्मीद है कि उनकी यह फिल्म भी सफलता के मामले में पिछली फिल्मों की तरह ही रहेगी।

6 जनवरी 2012 को शहर के नामी मल्टीप्लेक्स में प्रात:कालीन शो देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। महंगी टिकट लेकर परिवार के साथ फिल्म को देखना शुरू किया। मुश्किल से पन्द्रह मिनट बीते होंगे कि अचानक हमारे पीछे की कतार से ऎसी आवाजें आई जिनको सुनकर हैरानी के साथ शर्मिन्दगी का अहसास हुआ। साथ ही मन में यह विचार भी उठा कि क्या यही है मल्टीप्लेक्स सिनेमा जिनके बारे में इतना कुछ प्रचारित किया जाता है जैसे हम स्वर्ग में बैठ सिनेमा देख रहे हों। मन में उठे इन विचारों के साथ आँखें फिल्म को देखने के लिए परदे पर जमीं हुई थी कि अचानक फिर कानों में एक ऎसा वाक्य टकराया जिसने मजबूरन हमें खडे होकर उस युवा को चुपचाप बैठने का निर्देश देने के लिए मजबूर किया। तभी हमारी कतार में बैठी एक महिला ने व्यंग्य किया, “चवन्नी छाप व्यक्ति हर जगह मिल जाते हैं। कमाई बढ गई लेकिन संस्कार नहीं बदले।

” जब मल्टीप्लेक्स नहीं थे, लोग अपने घरवालों को फिल्म दिखाने के लिए ले जाते थे तो बालकनी का टिकट लेते थे। बालकनी में फिल्म देखना थोडा-सा महँगा तो होता था, पर इस बात की गारंटी भी होती थी कि वहाँ सभ्य लोग मिलेंगे। मिलते भी थे। बालकनी और चवन्नी क्लास का दर्शक वर्ग अलग-अलग दिल-दिमाग वाला होता था। नीचे हॉल में हीरोइन की एंट्री पर सीटियाँ बजती थीं। कई संवादों के पूरक संवाद दर्शक बोलते थे। ये पूरक संवाद घोर अश्लील हुआ करते थे। कोई गैरत वाला शख्स अगर परिवार के साथ चवन्नी क्लास में बैठ जाए तो उसका झगडा जरूर कुछ दर्शकों से हुआ करता था। सस्ती टिकट दर पर फिल्म देखने वाले फिल्म भी देखते थे और अपनी कुंठाओं का रेचन भी किया करते थे। जब-जब नीचे इस तरह का हंगामा होता था, बालकनी में बैठा वर्ग चैन की साँस लेकर सोचता था कि बालकनी का टिकट लेकर उसने समझदारी का काम किया है। बालकनी के गेटकीपर और अन्य सिनेमा स्टाफ भी इस बात का विशेष ध्यान रखता था। अगर कोई चवन्नैया गलती से बालकनी का टिकट लेकर बैठ भी जाता था और कुछ बोलता था तो उसे खामोश और संयमित रखा जाता था। एक आवाज निकालते ही तुरन्त गेटकीपर हाथ में टॉर्च लेकर आता था और जिधर से आवाज आती थी उस कतार में रोशनी फेंकते हुए कहता था- ठीक से बैठो वरना….।

कई बार ऎसा भी होता था कि चवन्नी क्लास के दर्शक जब पाते थे कि आज कुछ लोग परिवार सहित फिल्म देख रहे हैं तो वो खुद ही संयमित होकर सिनेमा देखते थे। लेकिन अब जो हालात देखने को मिल रहे हैं उसे देखकर अफसोस होता है और मन में विचार उठता कि अब वो बालकनी वाला सभ्य दर्शक वर्ग पूरी तरह या तो खत्म हो गया है या फिर उसका असर नहीं रहा है। इन दिनों मल्टीप्लेक्स में जो युवा फिल्म देखते हैं, वे लगभग हर दृश्य पर फब्ती कसते हैं, अश्लील रिमार्क पास करते हैं। उन्हें इस बात की बिलकुल परवाह नहीं होती कि महिलाएँ भी बैठी हैं और उम्र में उनसे बडे भी सिनेमाघर में मौजूद हैं। पुराने सिनेमाघर का जो चवन्नी श्रेणी वाला दर्शक था, वह अब मल्टीप्लेक्स में महँगा टिकट खरीदकर भद्दापन कर रहा है। अगर आप अपने कुछ मित्रों के साथ हैं, तो इसका यह मतलब तो नहीं होता कि आपको बदतमीजी का हक मिल गया है। जो फब्तियाँ आप दस मित्रों के बल पर कस रहे हैं, क्या अकेले में कस सकते थे। जो लोग सिनेमाघरों में अश्लील फब्तियाँ कसते हैं वे खुद कल्पना करें कि यदि वे अपने परिवार के साथ फिल्म देख रहे होते तो उन्हें किसी अन्य के भद्दे कमेंट कैसे लगते। अब मल्टीप्लेक्स का स्टाफ भी अपने काम से काम रखने वाला हो गया है। यहां का गेटकीपर सिर्फ सीट नम्बर की कतार बताता है और फिल्म शुरू होने के बाद वह गेट को बन्द करके हॉल से बाहर चला जाता है। इसके बाद दर्शकों में कौन-कैसा व्यवहार करता है, इसकी परवाह उन्हें नहीं होती। इस मामले में पुराने सिनेमाघर के कर्मचारी अच्छे हुआ करते थे जो बदतमीज दर्शक से भिडने की हिम्मत रखते थे। असभ्य हुए दर्शकों के कारण मल्टीप्लेक्स भी अब परिवारों के बैठने लायक नहीं बचे हैं।

हमारा युवा अधिक पढा-लिखा है, अधिक स्मार्ट है, समझदार है किन्तु अफसोस कि वह सभ्य नहीं है। ऎसा नहीं कि इस युवा में हमारे बच्चे शामिल नहीं हैं। वो भी इसी भीड का एक हिस्सा बन जाते हैं, इसलिए आजकल परिवार के साथ फिल्म देखना वे पसन्द नहीं करते हैं। इसकी वजह यही है कि वह यह सोचता कि अगर मैं अपने परिवार के साथ फिल्म देखने जाऊंगा तो मेरे दोस्त कहेंगे कि डरपोक साला। इस बात को देखकर तो और तकलीफ होती है कि इस तरह अश्लील और भद्दे रिमार्क पास करने वाले दर्शक कई बार अपनी लडकी दोस्तों के साथ होते हैं। इनकी हरकतों पर इन्हें रोकने की बजाय इनकी दोस्त अपना मनोरंजन करती हैं, इनके साथ हंसती और उनकी बातों पर खुश होती हैं कि उनका मित्र कितना हिम्मतवाला है जो इस तरह का व्यवहार सबके बीच होकर कर रहा है।
यह कैसा समाज है। और ये कैसे संस्कार हैं जो हम अपने बच्चों को दे रहे हैं। इसमें सिर्फ बच्चों का ही नहीं हमारा भी बराबर का योगदान रहता है। अपने घर पर अपने बोलचाल पर स्वयं को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं। बदलते सामाजिक परिवेश में आज रिश्तों में एक ऎसी तल्खी आ गई है जिसने रिश्तों को एक किनारे पर कर दिया है। पत्नी पति आपस में इस तरह का संवाद करते हैं जिसे सुनकर वो पीढी शर्मिदा होती है जिसने उसे जन्म दिया है और वो पीढी यही सीखती है जिसे हमने जन्म दिया है। ये कैसे संस्कार हैं जो हम अपनी पीढी को दे रहे हैं।
पहले अधिक पैसा खर्च करने के बाद अच्छे माहौल की गारंटी होती थी। आज कई गुना ज्यादा पैसा खर्च करने के बाद भी इस बात की गारंटी नहीं है कि आपको सभ्य और सुसंस्कृत माहौल मिलेगा। बदतमीजी अब फैशन बन गई है। महँगे सिनेमाघरों से लेकर सितारा होटलों तक अब अगर कोई गैरमौजूद है, तो वह है सभ्यता, लिहाज और महिलाओं का सम्मान।

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बिग बॉस से मिली नई उडान:सनी लियोन

शनिवार 7 जनवरी को कलर्स चैनल के विवादित और चर्चित रियलिटी शो बिग बॉस-5 का समापन होने जा रहा है। इस दिन इस सीजन के विजेता की घोष्ाणा होगी।

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इस शो ने अपने सीजन-5 में जबरदस्त विवादों को जन्म देने के साथ ही भारत-कनाडाई पोर्न स्टार सनी लियोन के कारण जबरदस्त चर्चा पाई।

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एक पोर्न स्टार के साथ-साथ समय-समय पर विवादित और चर्चित हस्तियों को अपने घर में लाकर बिग बॉस ने अपनी टीआरपी बढाने की बहुत कोशिश की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

जिस तरह से बॉलीवुड में वर्ष 2011 में कई बदलाव देखने को मिले उसी तरह से छोटे परदे पर भी वर्ष 2011 काफी बदलावों वाला वर्ष रहा। इस वर्ष टीवी के छोटे परदे पर कई नामी गिरामी बॉलीवुड के सितारों का आगमन जहां उनके लिए शुभ साबित हुआ वहीं वह छोटे परदे के दर्शकों के लिए भी लाभकारी रहा। इन सितारों के आगमन से छोटे परदे को देखने वालों का प्रतिशत बढा और कई कार्यक्रमों ने इनकी बदौलत अच्छी सफलता प्राप्त की। टीवी इंडस्ट्री के लिए यह साल काफी बदलावों का रहा। शोज के करैक्टर्स से लेकर कंटेंट तक में काफी चेंज आया। यही नहीं, काफी समय से सामाजिक मुद्दों पर फोकस कर रहे छोटे पर्दे के निर्देशकों ने इस साल यूथ बेस्ड और कंटम्पररी शो की ओर मुड गए। टीवी के लिए यह साल ठीक-ठाक रहा। इस साल लगातार कई शोज को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला। हालांकि कुछ सीरियल शुरूआत से ही ऎसे फिसले कि उनके ऑफ एयर होने की नौबत आ गई। वैसे, कई नए शोज देखते ही देखते दर्शकों के दिलों पर छा गए। वर्ष 2011 में दर्शकों में सर्वाधिक चर्चा पाने में प्रथम रहा बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन द्वारा प्रस्तुत किया गया शो “कौन बनेगा करोडपति”।

इस शो ने एक बार फिर इतिहास रचा, जब इसकी हाइएस्ट टीआरपी 8.7 पर पहुंच गई। इस शो ने अपनी टैग लाइन “कोई इंसान छोटा नहीं होता” को चरितार्थ करते हुए इस बार बिहार के मोतीहारी जिले के एक ऎसे आम इंसान सुशील कुमार को करोडपति बनाया जो एक कम्प्यूटर शिक्षक है, जिसे मात्र 6 हजार रूपये माहवार तनख्वाह मिलती है। इसके अतिरिक्त इस शो से जिन विजेताओं ने लाखों रूपये का पुरस्कार जीता वे सब भी बेहद आम इंसानों की श्रेणी में शामिल हुए। सोनी टीवी का यह रियलिटी शो इस वर्ष 2012 अगस्त से एक बार फिर दर्शकों के सम्मुख होगा। जब से यह समाचार टीवी उद्योग में फैला है तभी से अन्य टीवी चैनल इस शो के मुकाबले अपने प्रसारित होने वाले शोज पर अभी से नजर रखना शुरू कर रहे हैं। सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाले तीन और कार्यक्रम ऎसे रहे जिन्होंने दर्शकों की जबरदस्त वाहवाही लूटने में कामयाबी पाई है। इस वर्ष इस चैनल पर जिस शो ने पूरे परिवार को अपने साथ जोडने में कामयाबी पाई वह “बडे अच्छे लगते हैं” रहा। इस शो के द्वारा टीवी के परदे पर दो मंझे हुए अदाकारों राम कपूर और साक्षी तंवर की वापसी हुई। अपनी जीवंत अदाकारी के चलते इन दोनों सितारों ने इस शो को जनप्रिय बनाने में सफलता प्राप्त की। अपने मोटापे के बावजूद राम कपूर और अपनी उम्र के मुताबिक साक्षी तंवर ने धारावाहिक के किरदारों राम कपूर और प्रिया को अभिनीत करने में सफलता प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त इस शो के निर्देशक की तारीफ करेंगे जिन्होंने शो में कई ऎसे रोचक मोड अब तक पेश किए जिससे इसे देखने वालों में उत्सुकता जारी रहती है। नव वर्ष से दो दिन से प्रसारित हो रही कडियों के जरिए निर्देशक व लेखक ने जो नाटकीय मोड धारावाहिक में डाले हैं उनसे इस धारावाहिक को देखने की उत्सुकता जबरदस्त ठंड के बावजूद दर्शकों में बढती जा रही है। देर रात 10.30 बजे प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम को देखने का जज्बा दर्शकों में बरकरार है। ऎसा ही कुछ आलम रात दस बजे प्रसारित होने वाले शो सास बिना ससुराल का है। सास बिना ससुराल एक ऎसा धारावाहिक है जो पूरी तरह से युवाओं पर केन्द्रित है। पारिवारिक माहौल के इर्द गिर्द घूमते इस शो में युवाओं को एकता के डोर में बंधने की सीख देते हुए यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि आज के माहौल में जरूरी है कि परिवार संयुक्त रूप में एक साथ रहे। इसी चैनल पर हाल ही में शुरू हुए धारावाहिक परवरिश भी शुरूआत से ही अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब हुआ है। श्वेता तिवारी के साथ विवेक मुशरान के अभिनय से सजे इस धारावाहिक में दो एकल परिवारों की कहानी बच्चों को केन्द्र में रखकर बुनी गई है। किशोरावस्था के बच्चों के मध्य किस तरह से माता-पिता अपनी सोच, अपनी भावनाओं और उन पर अपनी पकड उनके विचारों के अनुरूप ढालने में सफलता प्राप्त करते हैं यही इस धारावाहिक का मुख्य बिन्दु है। इन्हीं धारावाहिकों में एक और धारावाहिक ऎसा है जिसने शुरूआत तो धीमी गति से की लेकिन अब उसके दर्शकों की संख्या में इजाफा होने लगा है। यह धारावाहिक है मोहनीश बहल की वापसी वाला “कुछ तो लोग कहेंगे” जिसमें उनके साथ हैं कृतिका। पंजाबी परिवार की इस युवा लडकी ने अपनी उम्र से दोगुने मोहनीश बहल के साथ जिस खूबसूरती के साथ अपनी अभिनय क्षमता को प्रकट किया है वह दर्शकों को उनके साथ जोडने में सफल हो रहा है। हालांकि इस धारावाहिक को उन लोगों द्वारा पसन्द किया जा रहा है जो प्रौढावस्था में प्रवेश कर रहे हैं अर्थात् वे दर्शक जो 45 वर्ष से ऊपर की उम्र के हो चुके हैं और जिन्हें इस तरह का धारावाहिक अपने अतीत में झांकने का मौका दे रहा है। धारावाहिकों की सफलता के मामले में जी टीवी अपनी साख को बरकरार नहीं रख पा रहा है। जी टीवी पर प्रसारित हो रहे एकता कपूर के धारावाहिक “पवित्र रिश्ता” को वो सफलता नहीं मिली है जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इस धारावाहिक को दर्शकों में लोकप्रिय बनाने के कई प्रयास अब तक किए जा चुके हैं इसके बावजूद यह सिर्फ 2.8 की एवरेज टीआरपी लेकर चल रहा है। कमोबेश कुछ ऎसा ही हाल इसी चैनल पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक “यहां मैं घर घर खेली” का है। इसे भी लगभग 2.6 की एवरेज टीआरपी मिल रही है। जी टीवी की ख्याति को थोडा बहुत आगे बढाने में सबसे आगे रहा “लिटिल चैम्प”। आठ वर्ष से चौदह वर्ष की उम्र पर आधारित संगीतमय यह कार्यक्रम इन प्रतिभागियों की गायन क्षमता को आंकने का नायाब नमूना रहा। इस कार्यक्रम के निर्णायक मंडल में सुप्रसिद्ध संगीतज्ञ कैलाश खेर, अदनान सामी और जावेद अली मुख्य निर्णायक थे। इनके साथ महागुरू के रूप में सुप्रसिद्ध गायिका अल्का याज्ञनिक ने भी अहम् भूमिका निभाई। इस कार्यक्रम में सुरों की जो जंग पेश की गई वह तारीफे-काबिल थी। हर प्रतिभागी अपने हुनर का उस्ताद नजर आया लेकिन बाजी मारी जयपुर के दस वर्षीय अजमत हुसैन ने, जो एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हुए भी अपनी संगीत शिक्षा को बरकरार रख रहा है। हुनर के काबिल इस बालक को राजस्थान सरकार ने हाउसिंग बोर्ड में एक मकान और पांच लाख रूपये का पुरस्कार दिया गया। दर्शकों के बीच पिछले चार वर्ष से शुरू हुए चैनल कलर्स को सही पहचान दिलाने में कामयाब रहा शो “बालिका वधू” काफी टि्वस्ट एंड टर्न के साथ 5.00 के करीब की एवरेज टीआरपी के साथ लोगों के बीच लोकप्रिय बना रहा। इस धारावाहिक ने दर्शकों के सामने अपनी पहली कडी 21 जुलाई 2008 को पेश की थी। आज यह धारावाहिक 896 कडियों के प्रसारण के बावजूद अपनी लोकप्रियता बरकरार रखते हुए चल रहा है। वहीं “उतरन” की इच्छा और तपस्या के बीच हुई तमाम कंट्रोवर्सीज के साथ यह शो लगभग 3.1 की एवरेज टीआरपी के साथ लोगों के बीच अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा। कलर्स की ख्याति को बढाने में धारावाहिक “परिचय” का भी योगदान उल्लेखनीय है। इस धारावाहिक से समीर सोनी ने टीवी जगत में वापसी की है। समीर सोनी के लिए वर्ष 2011 खासा भाग्यशाली रहा है। इस वर्ष उन्होंने अभिनेत्री नीलम के साथ विवाह भी किया है। टीवी जगत की महारानी कहलाने वाली एकता कपूर द्वारा निर्मित “परिचय : नई जिन्दगी के सपनों का” धारावाहिक जो 9 अगस्त से प्रसारित हो रहा है। इस धारावाहिक लोकप्रियता के मामले में एकता
कपूर के धारावाहिक “पवित्र रिश्ता” को पीछे छोड दिया है। वहीं स्टार प्लस के “साथ निभाना साथिया” की सफलता खुद चैनल के लिए भी हैरानी की बात है। करीब 6.0 की एवरेज टीआरपी के साथ यह एवरग्रीन शो के रूप में चलता रहा। “प्रतिज्ञा” और “ये रिश्ता क्या कहलाता है” भी लोगों की पसंद बने रहे। कॉमेडी शोज वाले चैनल सब टीवी पर “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” हर एज ग्रुप की पसंद बना रहा। इसी तरह सब टीवी पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम एफआईआर ने अपना एक अलग दर्शक वर्ग बनाया है जो इसे देखना पसन्द करता है। सब टीवी पर ही हाल ही में शुरू हुए धारावाहिक “चिडियाघर” ने भी अपने साथ दर्शकों को जोडने में सफलता प्राप्त की है। परिस्थितिजन्य हास्य पर आधारित इस धारावाहिक की जान हैं रेलवे में टिकट चैकर की भूमिका निभाने वाले परेश। अपने बेमिसाल अभिनय से उन्होंने इस धारावाहिक को दर्शकों में जबरदस्त लोकप्रिय बनाया है। गौरतलब है कि परेश ने दस साल तक रेलवे में नौकरी की है और यही अनुभव उन्हें इस धारावाहिक के पात्र को अभिनीत करने में काम आ रहा है। नॉन – फिक्शन शोज में इस साल पहली बार डांस शो के जरिए धर्मेन्द्र और रितिक रोशन ने छोटे पर्दे पर एंट्री की। कलर्स चैनल के इंडिया गॉट टैलेंट के जरिए पहली बार दर्शकों के सामने आए धर्मेन्द्र ने जबरदस्त धमाल मचाते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज की। इस शो के प्रति दर्शकों का आकर्षण सिर्फ और सिर्फ धर्मेन्द्र थे। हालांकि उनके साथ बतौर निर्णायक अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे और किरण खेर भी थी। ऋतिक रोशन ने भी स्टार प्लस के “जस्ट डांस” में जज की भूमिका निभाई। वैष्णवी मर्चेन्ट और फरहा खान सरीखी नृत्य निर्देशिकाओं के होते हुए भी ऋतिक का जलवा कुछ अलग ही रहा। वहीं संजय दत्त ने भी इस बार सलमान खान के साथ टीवी पर पदार्पण करते हुए “बिग बॉस” के जरिए छोटे परदे के दर्शकों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाबी प्राप्त की। इस शो का फाइनल शनिवार 7 जनवरी को प्रसारित होने वाली कडी में दिखाया जाएगा। इस साल छोटे पर्दे की सबसे दिलचस्प बात रही पुराने पॉपुलर चेहरों की वापसी। राम कपूर, साक्षी तंवर, श्वेता तिवारी, मोहनीश बहल , मिलिंद गुणाजी, समीर सोनी और शिल्पा राव जैसे कुछ ऎसे ही चेहरे हैं , जिन्होंने टीवी पर सफल वापसी की। वैसे, इस साल कई शोज में कई बडे रिप्लेसमेंट्स भी हुए। “पवित्र रिश्ता” के मानव यानी सुशांत सिंह राजपूत ने यह शो छोड दिया और एकता कपूर के कहने पर हितेन तेजवानी ने उनकी जगह ली। जीटीवी के शो “राम मिलाई जोडी” की लीड मोना यानी प्रियाल गोर की जगह सारा खान ने ली। इसी साल कलर्स के हिट शो “लागी तुझसे लगन” में मिशेल रहेजा की जगह शब्बीर आहलूवालिया आए। हालांकि इसके बाद इस शो की टीआरपी काफी नीचे चली गई। सुनने में आ रहा है कि शो “लागी तुझसे लगन” जल्द ही ऑफ एयर होने वाला है। दरअसल, टीआरपी के कम हो जाने की वजह से यह शो बंद किया जा रहा है। गौरतलब है कि यह निर्माता और चैनल का मिला जुला फैसला है। असल में, शो में बहुत से टि्वस्ट लाने के बावजूद इसकी टीआरपी में कुछ खास बढत नहीं हुई। वैसे भी अब कहानी में कहने लायक कुछ खास बचा नहीं है। यही वजह है कि शो को ऑफ एयर किया जा रहा है। हालांकि, इस बात का कोई ऑफिशल अनाउंसमेंट नहीं हुआ है, लेकिन छह जनवरी को इस शो के लास्ट एपिसोड के टेलिकास्ट होने की बात कही जा रही है। वहीं साल की शुरूआत में “बालिका वधु” में सबकी चहेती सुगणा का किरदार निभाने वालीं विभा आनंद ने भी यह शो छोड दिया और जीटीवी के लिए “संस्कार लक्ष्मी” में लीड रोल के लिए चुनी गई। अब यह अलग बात है कि शो खास चल नहीं पाया। दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखने के लिए कुछ शोज में बडे लीप भी आए। इनमें से कुछ को दर्शकों ने पसंद किया, लेकिन कुछ को वे बिल्कुल पचा नहीं पाए। ऎसे में जो दर्शकों के लिए चर्चा का विषय बने रहे “पवित्र रिश्ता”, “छोटी बहू” , “ना आना इस देस लाडो” और “फुलवा” ऎसे ही कुछ शोज रहे ।

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